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ब्राजील पर ट्रंप का टैरिफ अटैक: 50% शुल्क लागू

अमेरिका और ब्राजील के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर से उभर आया है। ट्रंप प्रशासन ने ब्राजील से आयातित कई प्रमुख उत्पादों पर 50% तक का टैरिफ लगा दिया है। इस फैसले को “आर्थिक संरक्षणवाद” की नीति के तहत देखा जा रहा है, जिसका असर दोनों देशों के व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है।

ब्राजील के राष्ट्रपति लुईज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने इस फैसले को “अनुचित और आक्रामक” करार देते हुए पलटवार की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ब्राजील जल्द ही जवाबी कदम उठाएगा जिससे अमेरिकी उत्पादों को भी झटका लगेगा। सिल्वा ने यह भी इशारा दिया कि वे WTO में इस मुद्दे को उठा सकते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि इस टैरिफ का असर ब्राजील की स्टील, कृषि और टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। अमेरिका में महंगाई को काबू करने की नीति के तहत ट्रंप यह कदम उठा रहे हैं, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में खटास आना तय है।

इस टैरिफ युद्ध से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर ब्राजील ने भी जवाबी टैरिफ लगाया, तो यह ट्रेड वॉर लंबा खिंच सकता है और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।

ब्राजील की अर्थव्यवस्था पर असर
ब्राजील के लिए अमेरिका एक बड़ा निर्यात बाज़ार है, खासकर कृषि उत्पादों, स्टील और खनिज पदार्थों के मामले में। 50% तक की टैरिफ दर लागू होने से ब्राजील के निर्यातकों की लागत बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धा कम होगी। इससे देश के व्यापार घाटे में वृद्धि हो सकती है, जो पहले से ही वैश्विक मंदी के चलते दबाव में है। इस टैरिफ का सीधा असर ब्राजील के छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों पर पड़ने की संभावना है।

अमेरिकी कंपनियों को भी होगा नुकसान
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सिर्फ ब्राजील को ही नहीं, बल्कि अमेरिकी कंपनियों को भी प्रभावित कर सकता है। अमेरिका में कई उद्योग ब्राजील से कच्चा माल आयात करते हैं। टैरिफ के कारण उन्हें महंगे दामों पर सामग्री खरीदनी पड़ेगी, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और अंततः महंगाई को और बल मिल सकता है। इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर भी असर पड़ेगा।

राजनीतिक मोर्चे पर गर्मी
इस टैरिफ के पीछे ट्रंप की घरेलू राजनीति भी मानी जा रही है। वे आगामी राष्ट्रपति चुनावों से पहले “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे को फिर से तेज़ करना चाहते हैं। हालांकि इस नीति की आलोचना यह कहकर की जा रही है कि इससे अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय छवि और संबंधों को नुकसान हो सकता है। ब्राजील, जो पहले अमेरिका के रणनीतिक साझेदारों में गिना जाता था, अब दूरी बनाता दिख सकता है।

WTO में कानूनी लड़ाई संभव
राष्ट्रपति सिल्वा ने संकेत दिए हैं कि वे इस टैरिफ के खिलाफ वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइज़ेशन (WTO) में कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह विवाद वैश्विक मंच पर पहुंच जाएगा और दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में आमतौर पर समाधान लंबा खिंचता है और इसका असर वैश्विक निवेशकों की धारणा पर भी पड़ सकता है।

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