
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 को लेकर देश की राजनीति एक अहम मोड़ पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे सर्वसम्मति से एक योग्य उम्मीदवार का चुनाव करें ताकि लोकतंत्र की मजबूती और राष्ट्रीय एकता का संदेश पूरे देश को दिया जा सके। पीएम मोदी ने विशेष रूप से सीपी राधाकृष्णन के नाम का उल्लेख करते हुए विपक्ष समेत सभी दलों से समर्थन की गुहार लगाई है। उनका मानना है कि उपराष्ट्रपति का पद केवल एक संवैधानिक दायित्व नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं को और मजबूत करने का माध्यम भी है।
सीपी राधाकृष्णन भारतीय राजनीति में एक अनुभवी और सम्मानित चेहरा माने जाते हैं। वे लंबे समय से संगठन और सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं और कई महत्वपूर्ण दायित्वों को सफलतापूर्वक निभा चुके हैं। भाजपा का मानना है कि उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली में वह संतुलन है जिसकी अपेक्षा उपराष्ट्रपति जैसे उच्च पद से की जाती है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों से भी यह उम्मीद जताई है कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में एक सर्वसम्मत निर्णय लेंगे।
भारत की लोकतांत्रिक परंपरा यह बताती है कि कई मौकों पर बड़े संवैधानिक पदों पर सर्वसम्मति से निर्णय लिए गए हैं। यह न केवल राजनीतिक परिपक्वता का प्रतीक होता है बल्कि जनता के बीच यह संदेश भी जाता है कि लोकतंत्र केवल सत्ता की लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सहमति और संवाद पर आधारित है। पीएम मोदी की यह अपील उसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
हालांकि, विपक्ष की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कुछ विपक्षी दल यह मानते हैं कि ऐसे संवैधानिक पदों पर चुनाव भी लोकतंत्र का हिस्सा है और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आवश्यक है। वहीं, कुछ दल पीएम मोदी की अपील पर विचार कर रहे हैं और संभव है कि आने वाले दिनों में वे सर्वसम्मति के पक्ष में अपना रुख स्पष्ट करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उपराष्ट्रपति पद के लिए सर्वसम्मति बनती है तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश होगा। इससे संसद की गरिमा और संसदीय परंपराओं को भी नई मजबूती मिलेगी। दूसरी ओर, अगर चुनावी मुकाबला होता है तो यह लोकतंत्र की बहुलता का प्रतीक होगा।
कुल मिलाकर, उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के सहयोग, सहमति और परिपक्वता की कसौटी भी है। पीएम मोदी की अपील और सीपी राधाकृष्णन का नाम इस प्रक्रिया को और रोचक बना रहा है। अब देखना यह होगा कि विपक्ष इस अपील का क्या जवाब देता है और देश को किस प्रकार का उपराष्ट्रपति मिलता है।



