
रूस और भारत के बीच रक्षा व रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देने की ओर एक बड़ा कदम — व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से ठीक पहले, रूस की संसद (स्टेट डुमा) आज एक महत्वपूर्ण रक्षा‑समझौते पर मतदान करने जा रही है। यह समझौता, जिसे Reciprocal Exchange of Logistics Agreement (RELOS) के नाम से जाना जाता है, फरवरी 2025 में दोनों देशों द्वारा मोस्को में हस्ताक्षरित हुआ था। इस समझौते के तहत भारत और रूस को पारस्परिक रूप से अपने-अपने क्षेत्र में सैनिक, युद्धपोत और वायु उड़ान भेजने की सुविधा मिलेगी, साथ ही तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता का भी दायरा तय होगा।
विश्लेषकों का कहना है कि RELOS समझौते की स्वीकृति, भारत और रूस के बीच “विशेष और привिलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” को और गहरा करेगी। इसके साथ ही, यह भारत को अपनी रक्षा तैयारियों में लचीलापन और बहुआयामी रणनीतिक विकल्प उपलब्ध कराने में मदद करेगा। कई रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की वायु व समुद्री रक्षा क्षमता को बढ़ाने और देश की सुरक्षा रणनीति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं।
पुतिन की इस यात्रा के दौरान इस समझौते के साथ-साथ ऊर्जा, तेल, क्रूड इम्पोर्ट, स्पेस एवं अन्य रक्षा-उपकरणों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। अगर ये सभी प्रस्ताव सफल होते हैं, तो यह भारत-रूस संबंधों के एक नए युग की शुरुआत हो सकती है।



