
नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया। हादसे के बाद 105 भारतीयों समेत सैकड़ों पर्यटकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार कुल 384 लोग लापता बताए गए हैं, जिनमें 291 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर के बाद भारतीय दूतावास सक्रिय हो गया है। प्रभावित लोगों और उनके परिजनों तक जानकारी पहुंचाने के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिक या उनके बारे में जानकारी रखने वाले लोग इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।
बाढ़ के कारण नेपाल के कई सीमावर्ती और नदी किनारे के इलाकों में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में खोज अभियान चला रहे हैं। खराब मौसम और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ रही हैं।
इस बीच भारत ने नेपाल की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बातचीत कर हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया है। भारत की ओर से राहत सामग्री भेजने की तैयारी की गई है।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक भारत ने नेपाल के लिए राहत सहायता भेजी है, जिसमें आवश्यक दवाइयां और जीवनरक्षक सामग्री शामिल है। भारत ने संकट की इस घड़ी में नेपाल के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता जताई है।
नेपाल में फंसे भारतीयों को लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार में भी चिंता बढ़ गई है। दोनों राज्यों के नेपाल से सटे इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई है। संभावित जलस्तर बढ़ने और बाढ़ के असर को देखते हुए संबंधित एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए यात्रियों और स्थानीय लोगों से नदियों, पुलों तथा जोखिम वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की जा रही है। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान प्रशासन का मुख्य फोकस लापता लोगों की तलाश और प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने पर है।
कुल मिलाकर, नेपाल की भीषण बाढ़ ने भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता पैदा कर दी है। 105 भारतीयों समेत सैकड़ों लोगों के लापता होने के बीच भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन जारी की है, जबकि भारत ने नेपाल को राहत और मानवीय सहायता भेजना शुरू कर दिया है।



