धर्म-आस्थाबड़ी खबर

Ahoi Ashtami 2026: कौन हैं अहोई माता, जानें व्रत का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, तरक्की और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा-अर्चना करने के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।

कौन हैं अहोई माता?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई माता को मां पार्वती का स्वरूप माना जाता है। उन्हें संतान की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि अहोई माता अपने भक्तों की संतानों को सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद देती हैं। कुछ परंपराओं में उन्हें स्याहु माता के नाम से भी जाना जाता है। अहोई माता की पूजा में उनके चित्र के साथ साही और उसके बच्चों की आकृतियां बनाने की भी परंपरा है।

क्यों रखा जाता है अहोई अष्टमी का व्रत?

अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान के कल्याण के लिए रखती हैं। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन विधि-विधान से अहोई माता की पूजा करने और व्रत कथा सुनने से बच्चों पर माता की कृपा बनी रहती है। महिलाएं संतान की लंबी उम्र, बेहतर स्वास्थ्य, सफलता और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए माता से प्रार्थना करती हैं। कुछ मान्यताओं में निःसंतान महिलाएं भी संतान प्राप्ति की कामना से यह व्रत करती हैं।

अहोई माता की पूजा में साही का क्या महत्व है?

अहोई अष्टमी की पूजा में साही और उसके बच्चों का विशेष महत्व बताया जाता है। इसके पीछे एक पौराणिक लोककथा प्रचलित है। कथा के अनुसार, एक महिला से मिट्टी खोदते समय अनजाने में साही के बच्चे की मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद उसे पश्चाताप हुआ और उसने माता की आराधना कर क्षमा मांगी। इसी प्रसंग के कारण अहोई माता के चित्र के साथ साही और उसके बच्चों की आकृतियां बनाने की परंपरा शुरू हुई। इस कथा में जीवों के प्रति दया और करुणा का संदेश भी मिलता है।

अहोई अष्टमी पर कैसे होती है पूजा?

इस दिन सुबह स्नान के बाद महिलाएं संतान की सुख-समृद्धि के लिए व्रत का संकल्प लेती हैं। शाम के समय अहोई माता का चित्र स्थापित करके रोली, चावल, फूल, दीपक और मिठाई आदि से पूजा की जाती है। इसके बाद अहोई माता की व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाती है। कई घरों में साही और उसके बच्चों की आकृतियों की भी पूजा की जाती है। शाम को तारे दिखाई देने पर उन्हें अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों और परिवारों में पूजा-पारण की परंपरा अलग हो सकती है।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक कथाओं पर आधारित है। इसमें बताए गए पूजा-विधान और मान्यताओं को धार्मिक आस्था के दृष्टिकोण से समझें। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में परंपराओं में अंतर हो सकता है।

Zee NewsTimes

Founded in 2018, Zee News Times has quickly emerged as a leading news source based in Lucknow, Uttar Pradesh. Our mission is to inspire, educate, and outfit our readers for a lifetime of adventure and stewardship, reflecting our commitment to providing comprehensive and reliable news coverage.

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button