UP Nari Shakti: लखनऊ में छात्राओं ने कहा- अब सम्मान नहीं, नेतृत्व का समय

लखनऊ में नारी शक्ति को लेकर आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं ने अपनी आवाज बुलंद की। कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि महिलाओं के लिए अब केवल सम्मान की बात करने के बजाय उन्हें नेतृत्व के अवसर देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
छात्राओं ने कहा कि बदलते भारत में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। शिक्षा से लेकर विज्ञान, प्रशासन, कारोबार और राजनीति तक महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में निर्णय लेने वाली संस्थाओं में भी उनकी मौजूदगी मजबूत होनी चाहिए।
कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण को केवल योजनाओं और नारों तक सीमित नहीं रखने पर जोर दिया गया। वक्ताओं के अनुसार वास्तविक सशक्तीकरण तब होगा, जब महिलाओं को अपनी प्रतिभा और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलेंगे।
छात्राओं ने कहा कि युवतियों को नेतृत्व कौशल विकसित करने के लिए बेहतर शिक्षा, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की जरूरत है। उन्हें अपने फैसले खुद लेने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र करते हुए कार्यक्रम में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी मजबूत होने से नीतियों और सामाजिक विकास में व्यापक बदलाव आ सकता है।
कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि महिलाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी केवल सरकार या संस्थानों की नहीं है। परिवार और समाज की सोच में बदलाव भी जरूरी है, ताकि बेटियों को शिक्षा, करियर और नेतृत्व के समान अवसर मिल सकें।
छात्राओं ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता महिलाओं के सशक्तीकरण की महत्वपूर्ण कड़ी है। आर्थिक रूप से मजबूत महिलाएं अपने जीवन से जुड़े फैसलों में अधिक स्वतंत्र भूमिका निभा सकती हैं और परिवार व समाज के विकास में योगदान दे सकती हैं।
लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम ने युवतियों के बीच नेतृत्व और आत्मविश्वास को लेकर सकारात्मक संदेश दिया। छात्राओं की भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि नई पीढ़ी की महिलाएं केवल अवसर पाने की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और नेतृत्व संभालने की भी इच्छुक हैं।
कार्यक्रम का व्यापक संदेश यही रहा कि नारी शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए सम्मान के साथ अधिकार, अवसर और नेतृत्व की भूमिका भी सुनिश्चित करनी होगी। जब महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में बराबर स्थान मिलेगा, तभी समाज और देश के विकास को नई गति मिल सकेगी।



