UP Water Infrastructure: जल संरचनाओं का कायाकल्प

योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश की दशकों पुरानी जल संरचनाओं के कायाकल्प पर विशेष ध्यान दिया गया है। बैराज, बांध, हेड रेगुलेटर और अन्य जल यांत्रिक संरचनाओं के खराब गेटों को आधुनिक गेटों से बदला जा रहा है, जिससे सिंचाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और बाढ़ के जोखिम से निपटने में मदद मिल सके।
गोमती बैराज के सभी 10 गेट और हिंडन बैराज के सभी 8 गेट बदले जा चुके हैं। वहीं ओखला बैराज के 27 में से 18 और नरौरा बैराज के 61 में से 13 गेट बदले गए हैं, जबकि बाकी गेटों पर काम जारी है।
प्रदेश में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पानी के भीतर गेट बदलने की तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया। ललितपुर के माताटीला बांध, मेजा-जरगो लिंक रेगुलेटर और कचनौदा बांध में करीब 60 से 70 फीट की गहराई पर अंडर-स्लूइस गेटों को बदला गया। चंद्रप्रभा बांध में गहरे पानी में रिसाव की समस्या को भी दूर किया गया।
सरकार ने संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए कुछ संवेदनशील बैराजों के लिए स्पेयर गेट भी तैयार रखे हैं। दूसरी ओर, 2026-27 में राज्य ने 1,070 सिंचाई परियोजनाओं के लिए करीब ₹2,380.69 करोड़ की पहली किस्त स्वीकृत की है और बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं के लिए करीब ₹1,009.99 करोड़ मंजूर किए गए हैं।



