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ट्रेन के इंजन में टॉयलेट क्यों नहीं होता? जानें ड्राइवर कैसे करते हैं मैनेज

अक्सर यात्रियों के मन में यह सवाल आता है कि ट्रेन के डिब्बों में तो टॉयलेट होते हैं, लेकिन ट्रेन के इंजन यानी लोकोमोटिव में टॉयलेट क्यों नहीं होता। हैरानी की बात यह है कि इतनी लंबी दूरी तक ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट आखिर बिना वॉशरूम के कैसे मैनेज करते हैं। वास्तव में इसका मुख्य कारण इंजन का डिज़ाइन और सुरक्षा से जुड़ा हुआ ढांचा है। ट्रेन का इंजन एक हाई-टेक कंट्रोल रूम की तरह होता है जिसमें जगह काफी सीमित होती है। यहां का हर एक इंच स्पेस ब्रेक सिस्टम, कंट्रोल पैनल, मशीनरी, सेफ्टी उपकरण और मॉनिटरिंग सिस्टम से भरा रहता है। ऐसे में टॉयलेट जैसी व्यवस्था के लिए अलग जगह निकालना बेहद कठिन होता है। इसके अलावा इंजन को हल्का और कॉम्पैक्ट रखना भी ज़रूरी होता है ताकि वह अधिक भार न उठाए।

अब सवाल उठता है कि बिना टॉयलेट के लंबी दूरी की यात्रा के दौरान ड्राइवर कैसे मैनेज करते हैं। अक्सर ट्रेनें दो लोको पायलट—एक मुख्य और एक असिस्टेंट—के साथ चलती हैं। ज़रूरत पड़ने पर ड्राइवर चलती ट्रेन को सुरक्षित जगह पर रोक सकते हैं, आमतौर पर किसी स्टेशन या टेक्निकल हॉल्ट पर। कई बार दोनों ड्राइवर शिफ्ट के आधार पर काम करते हैं, जिससे एक को ज़रूरत पड़ने पर ब्रेक मिल सके। लंबी दूरी की ट्रेनों में ऐसे हॉल्ट पहले से प्लान किए जाते हैं। कुछ मामलों में इंजन से उतरकर इंजन के पास बने खुले क्षेत्र का भी उपयोग कर लिया जाता है, हालांकि यह केवल मजबूरी की स्थिति में होता है।

नई तकनीक के आने के बाद रेलवे ने कुछ आधुनिक इंजनों में टॉयलेट लगाने पर विचार भी किया है। कई देश में ऐसे लोकोमोटिव पहले से उपयोग में हैं। भारत में भी नए इंजन मॉडलों में छोटे, कॉम्पैक्ट और सुरक्षित टॉयलेट बनाने के लिए डिज़ाइन पर काम हो रहा है, ताकि लोको पायलटों को राहत मिल सके। हालांकि पुराने इंजनों में ऐसा करना मुश्किल है, इसलिए अभी भी अधिकतर लोको पायलट स्टेशन-हॉल्ट, शिफ्ट बदलने और अन्य तकनीकी उपायों से ही मैनेज करते हैं।

इस पूरे मुद्दे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ट्रेन ड्राइवर का काम अत्यंत जिम्मेदारी वाला होता है। उन्हें लगातार सतर्क रहना पड़ता है, इसलिए रेलवे उनकी सुविधा और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार नए समाधान खोज रहा है। भविष्य में जैसे-जैसे नए इंजन तैयार होंगे, लोको पायलटों को टॉयलेट की सुविधा मिलना भी आम बात बन सकती है।

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