SCO में भारत की पाकिस्तान रणनीति, चीन-अमेरिका के बीच 5 बड़े संकेत

भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में तनाव के बीच SCO का मंच दोनों देशों के अधिकारियों को एक बहुपक्षीय प्रारूप में साथ लाता है। भारत ने स्पष्ट किया कि इस यात्रा का उद्देश्य SCO से जुड़ी बैठक में भाग लेना था और पाकिस्तान के साथ कोई द्विपक्षीय बैठक निर्धारित नहीं थी।
इस्लामाबाद में हुई राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, ट्रांजिट और व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारतीय पक्ष ने इन विषयों को SCO के एजेंडे के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में रेखांकित किया।
चीन की भूमिका भी भारत की क्षेत्रीय कूटनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों के तनाव के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद बढ़ा है। विश्लेषकों के अनुसार, SCO जैसे मंच भारत को चीन, रूस और मध्य एशियाई देशों के साथ एक ही बहुपक्षीय ढांचे में संवाद बनाए रखने का अवसर देते हैं।
अमेरिका के साथ भारत के संबंध भी समानांतर रूप से जारी हैं। 30 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और उभरती तकनीकों समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस पूरे घटनाक्रम में भारत की कूटनीति का एक प्रमुख पहलू अलग-अलग बहुपक्षीय और द्विपक्षीय मंचों पर समानांतर संवाद बनाए रखना है। SCO में भागीदारी के साथ भारत अमेरिका के साथ रणनीतिक और आर्थिक बातचीत तथा चीन के साथ संवाद भी जारी रखे हुए है।



