
दशकों से चले आ रहे संघर्ष और कई बार के रक्तपात के बाद अब अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच शांति की एक नई उम्मीद जगी है। दोनों देशों के बीच नागोर्नो-काराबाख को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद आखिरकार शांति समझौते में बदल गया है। इस ऐतिहासिक समझौते को लेकर जहां अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, वहीं अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने इसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग की है।
यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई चर्चा का विषय बन गया है।
समझौते की पृष्ठभूमि
नागोर्नो-काराबाख को लेकर अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच कई बार युद्ध जैसे हालात बन चुके हैं। हाल के वर्षों में 2020 में हुए युद्ध ने सैकड़ों लोगों की जान ली और दोनों देशों की सीमाओं को अस्थिर किया। हालांकि अजरबैजान ने उस संघर्ष में बढ़त हासिल की थी, फिर भी स्थायी शांति अब तक elusive बनी हुई थी।
अभी हुए समझौते को लेकर राष्ट्रपति अलीयेव ने कहा कि यह केवल कूटनीति की जीत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है, जो पूरे काकेशस क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
ट्रंप की भूमिका की सराहना
अलीयेव ने अपने बयान में ट्रंप को “शांति और स्थायित्व का समर्थक” बताते हुए कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल में इस क्षेत्र में शांति लाने के लिए कई बार बैकचैनल वार्ताओं और मध्यस्थता प्रयासों का समर्थन किया था। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप की नीतियों और रणनीतिक संतुलन ने दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का माहौल बनाने में भूमिका निभाई।
राष्ट्रपति अलीयेव ने साफ शब्दों में कहा:
“शांति स्थापित करने में मदद करने के लिए ट्रंप ने जो पहल की थी, वह नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य है।”
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
हालांकि नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर निर्णायक प्रक्रिया स्वतंत्र और गोपनीय होती है, लेकिन इस प्रकार के सार्वजनिक समर्थन राजनीतिक संदेश जरूर देते हैं। अमेरिका सहित पश्चिमी देश अजरबैजान-आर्मेनिया शांति को क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से सकारात्मक कदम मान रहे हैं।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अलीयेव का यह बयान भविष्य की रणनीतिक समीकरणों को आकार देने की कोशिश भी हो सकता है, खासकर तब जब रूस, ईरान और तुर्की जैसे देश भी इस क्षेत्र में अपनी भूमिका चाहते हैं।
निष्कर्ष
अजरबैजान-आर्मेनिया के बीच हुआ यह शांति समझौता एक ऐतिहासिक मोड़ है, जिसने वर्षों की दुश्मनी और युद्ध की संभावनाओं पर विराम लगाया है। राष्ट्रपति अलीयेव द्वारा ट्रंप को नोबेल पुरस्कार के लिए आगे बढ़ाने की यह मांग जहां ट्रंप के अंतरराष्ट्रीय छवि को नई हवा दे सकती है, वहीं यह वैश्विक शांति प्रयासों में राजनीति और प्रभाव की जटिलता को भी उजागर करती है।
शांति के इस नए अध्याय में यदि राजनीति और कूटनीति दोनों साथ चलें, तो काकेशस क्षेत्र एक नई दिशा में अग्रसर हो सकता है।



