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भारत की परमाणु तैनाती पर पाकिस्तान की चेतावनी, कहा- रणनीतिक संतुलन के लिए विकल्पों पर विचार

पाकिस्तान के नेशनल कमांड अथॉरिटी (NCA) के सलाहकार खालिद किदवई ने कहा है कि भारत की परमाणु क्षमताओं में हो रहे विकास से दक्षिण एशिया का रणनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने विशेष रूप से भारत की परमाणु-सक्षम पनडुब्बियों, मिसाइलों के आधुनिकीकरण और समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी रिपोर्टों का उल्लेख किया।

किदवई ने इस्लामाबाद नॉन-प्रोलिफरेशन कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में रणनीतिक असंतुलन को स्वीकार नहीं करेगा। उनके मुताबिक, यदि पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी लगा, तो वह हथियारों की तैनाती के उपलब्ध विकल्पों की समीक्षा कर सकता है। यह बयान पाकिस्तान की ओर से दिया गया सुरक्षा आकलन है, न कि किसी नई तैनाती की आधिकारिक घोषणा।

खालिद किदवई ने क्या दी चेतावनी?

किदवई ने कहा कि पाकिस्तान रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी उपयुक्त विकल्पों पर विचार करेगा और अपनी रणनीतिक अस्पष्टता की नीति जारी रखेगा। उन्होंने भारत से पाकिस्तान की ‘फुल स्पेक्ट्रम डिटरेंस’ नीति के निहितार्थ समझने की अपील भी की।

पाकिस्तान की इस नीति का उद्देश्य विभिन्न स्तरों के संभावित खतरों के खिलाफ परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना बताया जाता है। किदवई की चेतावनी का आशय यह है कि पाकिस्तान भारत की सैन्य क्षमताओं में बदलाव के जवाब में अपने विकल्पों को खुला रखेगा। हालांकि, उन्होंने किसी खास हथियार की तैनाती, उसकी संख्या या समयसीमा की घोषणा नहीं की।

SIPRI रिपोर्ट में भारतीय परमाणु क्षमता को लेकर क्या कहा गया?

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की 2026 की रिपोर्ट और सार्वजनिक स्रोतों का हवाला देते हुए पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया कि भारत ने समुद्र आधारित प्रतिरोधक गश्त के लिए एक पनडुब्बी पर लगभग 12 परमाणु हथियार तैनात किए हो सकते हैं।

इस दावे को सावधानी से समझना जरूरी है। रिपोर्ट से जुड़े विश्लेषण में भी परमाणु हथियारों की वास्तविक तैनाती को लेकर अनिश्चितता का उल्लेख किया गया है। इसलिए इसे भारत की ओर से सार्वजनिक रूप से पुष्ट की गई नई तैनाती के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

भारत की ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति पर पाकिस्तान ने उठाए सवाल

भारत की घोषित परमाणु नीति में ‘नो फर्स्ट यूज’ यानी पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल न करने का सिद्धांत प्रमुख रहा है। पाकिस्तान के अधिकारियों का तर्क है कि परमाणु हथियारों की कथित समुद्री तैनाती, मिसाइलों को अधिक तत्पर स्थिति में रखने की तकनीक और सैन्य आधुनिकीकरण से इस नीति की व्यावहारिक विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

हालांकि, किसी हथियार प्रणाली को अधिक तैयार स्थिति में रखना अपने आप में घोषित परमाणु सिद्धांत में बदलाव का प्रमाण नहीं है। सैन्य क्षमता, हथियारों की वास्तविक तैनाती और परमाणु इस्तेमाल से जुड़ी नीति तीन अलग-अलग पहलू हैं। पाकिस्तान की टिप्पणियां उसके आकलन को दर्शाती हैं; भारत की नीति में औपचारिक बदलाव की पुष्टि इन बयानों से नहीं होती।

मिसाइलों और पनडुब्बियों के आधुनिकीकरण पर भी चिंता

किदवई और पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी सरफराज सत्तार ने भारत की मिसाइल क्षमताओं, समुद्र आधारित परमाणु प्रणालियों और व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाक्रमों से दोनों देशों के बीच संकट के समय गलत आकलन और तनाव बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है।

पनडुब्बियों से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें किसी देश को समुद्र से जवाबी हमला करने की क्षमता दे सकती हैं। परमाणु प्रतिरोधक रणनीति में इस क्षमता को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि समुद्र में छिपी पनडुब्बियों का पता लगाना कठिन हो सकता है। दूसरी ओर, ऐसी क्षमताओं के विकास से पड़ोसी देशों में सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ सकती हैं।

मई 2025 के सैन्य संघर्ष का भी किया जिक्र

पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी सरफराज सत्तार ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि पारंपरिक हथियारों से शुरू हुआ टकराव तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच मिसाइलों और रणनीतिक सैन्य संसाधनों के इस्तेमाल से यह स्पष्ट हुआ कि संकट के समय तनाव बढ़ने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

परमाणु हथियार रखने वाले दो पड़ोसी देशों के बीच संचार, संकट प्रबंधन और सैन्य गतिविधियों की स्पष्टता इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, ताकि गलतफहमी के कारण संघर्ष अनियंत्रित न हो।

क्या दक्षिण एशिया में परमाणु हथियारों की नई दौड़ शुरू हो सकती है?

पाकिस्तान की ताजा चेतावनी से क्षेत्रीय परमाणु प्रतिरोध और सैन्य आधुनिकीकरण पर बहस तेज हो सकती है। यदि दोनों देश एक-दूसरे की क्षमताओं के जवाब में नई तैनाती या हथियार प्रणालियों को प्राथमिकता देते हैं, तो सुरक्षा संबंधी प्रतिस्पर्धा बढ़ने का जोखिम रहेगा। हालांकि, अभी पाकिस्तान की ओर से विकल्पों की समीक्षा करने की बात कही गई है; किसी नई परमाणु तैनाती की पुष्टि नहीं की गई है।

क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से पारदर्शी संवाद, सैन्य हॉटलाइन और संकट के दौरान गलतफहमी दूर करने के उपाय महत्वपूर्ण हैं। फिलहाल किदवई का बयान पाकिस्तान की चेतावनी और उसके सुरक्षा आकलन को सामने लाता है, जबकि भारत की ओर से इस विशेष बयान पर कोई प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में शामिल स्रोतों से पुष्ट नहीं होती।

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