मणिपुर हिंसा पर मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र को घेरा, पूछा- शांति की पहल कहां गई?

मणिपुर में एक बार फिर हिंसा की घटनाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। 21 अक्टूबर 2026 को जारी बयान में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से पूछा कि राज्य में शांति बहाल करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। खरगे ने आरोप लगाया कि लंबे समय से जारी संघर्ष के बावजूद आम नागरिकों की सुरक्षा और विस्थापित परिवारों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ये आरोप कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से लगाए गए हैं; सरकार का पक्ष और संबंधित कार्रवाई का पूरा विवरण अलग से देखना जरूरी है।
ताजा हिंसा में नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाया
खरगे ने मणिपुर में हालिया हिंसक घटनाओं में नागरिकों की मौत पर दुख जताया और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के दिनों में इम्फाल ईस्ट और कांगपोकपी जिलों में अलग-अलग घटनाओं में चार नागरिकों की मौत हुई। इन घटनाओं के बाद स्थानीय स्तर पर बंद और विरोध प्रदर्शन भी हुए। ताजा घटनाओं ने राज्य में जातीय तनाव दोबारा बढ़ने की आशंका पैदा की है।
अमित शाह की शांति समिति पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने जून 2023 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से गठित शांति समिति की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि समिति ने अब तक शांति बहाली, नागरिकों की सुरक्षा और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए कौन-से ठोस कदम उठाए हैं। खरगे ने केंद्र से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि मणिपुर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए आगे की क्या योजना है।
राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित परिवारों की स्थिति पर चिंता
खरगे ने राज्य में जारी संकट के कारण अपने घरों से दूर रह रहे लोगों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, मई 2023 से अब तक 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और करीब 24,530 लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने महिलाओं, बच्चों और कमजोर परिवारों की सुरक्षा, सम्मान तथा पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा मांगा। ये आंकड़े खरगे के बयान और मीडिया रिपोर्टों में उद्धृत जानकारी पर आधारित हैं।
सुप्रीम कोर्ट की समिति की सिफारिशों पर मांगा जवाब
खरगे ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति की सिफारिशों पर हुई कार्रवाई के बारे में भी सवाल किया। उन्होंने राहत शिविरों में हुई संदिग्ध या अप्राकृतिक मौतों की जांच और विस्थापित लोगों के पुनर्वास की स्थिति पर जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों की सुरक्षा, गरिमा और बेहतर जीवन सुनिश्चित करना जरूरी है। इन मुद्दों पर वास्तविक प्रगति का आकलन संबंधित सरकारी जवाबों और न्यायालय के आदेशों के आधार पर किया जाना चाहिए।
सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग
खरगे ने कहा कि लंबे समय से जारी हिंसा, लोगों की मौत और बड़े पैमाने पर विस्थापन के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि शांति बहाली की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने राष्ट्रपति शासन और मुख्यमंत्री में बदलाव के बावजूद स्थायी शांति नहीं आने का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि मणिपुर के लोगों को न्याय, सुरक्षा और स्थायी शांति मिलनी चाहिए।
मणिपुर में स्थायी शांति बहाली बड़ी चुनौती
मई 2023 में शुरू हुआ मणिपुर का जातीय संघर्ष राज्य की सुरक्षा, सामाजिक संबंधों और विस्थापित परिवारों के जीवन को प्रभावित करता रहा है। हालिया हिंसा ने शांति बहाली की कोशिशों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा की हैं। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच राहत, पुनर्वास, निष्पक्ष जांच और सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। राज्य में स्थायी शांति के लिए किए जा रहे प्रयासों और उनके परिणामों पर आगे भी नजर रहेगी।



