भारत के पड़ोस में अमेरिका की सीक्रेट डिप्लोमेसी, म्यांमार के रेयर अर्थ पर नजर?

अमेरिका और म्यांमार की सैन्य समर्थित सरकार के बीच हाल में कम से कम दो दौर की गोपनीय बातचीत हुई है। पहली बैठक सितंबर 2026 में म्यांमार की राजधानी नेपीडॉ में हुई, जबकि दूसरी अक्टूबर में जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित की गई। रॉयटर्स के अनुसार, इन बैठकों से संकेत मिलता है कि 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद सैन्य नेतृत्व से दूरी बनाए रखने वाला अमेरिका अब कुछ मुद्दों पर सीमित संपर्क बढ़ा रहा है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि इस तरह की बातचीत का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के हित में व्यावहारिक नतीजे हासिल करना है। हालांकि, दोनों देशों के बीच बातचीत के सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
म्यांमार के नेतृत्व पर प्रतिबंध, फिर भी बातचीत क्यों?
फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना ने निर्वाचित सरकार को सत्ता से हटाकर नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था। इसके बाद अमेरिका ने सैन्य नेतृत्व और उससे जुड़ी कुछ संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए। मौजूदा सैन्य समर्थित नेतृत्व से बातचीत करना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह अमेरिका की पहले की दूरी बनाए रखने वाली नीति से अलग व्यावहारिक कदम है।
फिर भी, बातचीत का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने प्रतिबंध हटा दिए हैं या म्यांमार की सरकार को औपचारिक मान्यता दे दी है। अमेरिकी पक्ष ने कहा है कि इन संपर्कों का उद्देश्य सीमित मुद्दों पर ठोस प्रगति करना है।
रेयर अर्थ पर अमेरिका की नजर क्यों?
म्यांमार के साथ बातचीत का एक संभावित रणनीतिक कारण वहां मौजूद दुर्लभ पृथ्वी तत्वों यानी रेयर अर्थ के भंडार तक पहुंच हो सकता है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कुछ आधुनिक रक्षा प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले चुंबकों तथा अन्य तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
चीन रेयर अर्थ के प्रसंस्करण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी भूमिका निभाता है। अमेरिका के लिए वैकल्पिक स्रोत विकसित करना इसलिए रणनीतिक महत्व रखता है, ताकि जरूरी खनिजों के लिए किसी एक देश पर निर्भरता कम की जा सके। रॉयटर्स की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने म्यांमार के खनिज भंडार को वॉशिंगटन के प्रमुख संभावित हितों में से एक बताया है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हाल की बैठकों में इस विषय पर कोई ठोस समझौता हुआ या नहीं।
अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले साइबर स्कैम भी बड़ा मुद्दा
इन बैठकों का एक तत्काल उद्देश्य म्यांमार में सक्रिय साइबर ठगी केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई करना भी बताया गया है। ऐसे केंद्रों से जुड़े ऑनलाइन रोमांस और निवेश घोटालों में कई देशों के नागरिकों को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों की प्राथमिकताओं में इन नेटवर्कों को बंद कराने और ठगी से प्रभावित अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा करना शामिल है।
सितंबर की बैठक में एक अमेरिकी कारोबारी की रिहाई का मुद्दा भी उठाया गया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, सीमापार अपराध पर सहयोग ऐसा क्षेत्र है जहां बातचीत से अपेक्षाकृत जल्दी व्यावहारिक परिणाम मिल सकते हैं।
रेयर अर्थ तक पहुंच आसान नहीं, चीन की भूमिका अहम
म्यांमार के खनिज भंडार तक पहुंच हासिल करना अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा। कई महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र काचिन राज्य में हैं, जहां काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) जैसे जातीय सशस्त्र समूहों का नियंत्रण है। ये समूह म्यांमार की सैन्य समर्थित सरकार से संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में खनिजों की आपूर्ति के लिए केवल केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत पर्याप्त नहीं हो सकती।
इसके अलावा, म्यांमार से निकलने वाले कई रेयर अर्थ खनिज चीन में प्रसंस्करण के लिए भेजे जाते हैं। यदि अमेरिका वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था बनाने की कोशिश करता है, तो उसे खनन, परिवहन, प्रसंस्करण, स्थानीय सुरक्षा और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा।
भारत के लिए क्या है इस कूटनीति का महत्व?
म्यांमार भारत का पड़ोसी देश है और उसकी स्थिति दक्षिण एशिया तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यदि अमेरिका म्यांमार के खनिज संसाधनों तक पहुंच बनाने की कोशिश करता है, तो इसका असर क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं और चीन पर निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति पर पड़ सकता है।
भारत भी रेयर अर्थ के वैकल्पिक स्रोत तलाशने में रुचि रखता रहा है। 2025 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने म्यांमार के कुछ क्षेत्रों से रेयर अर्थ के नमूने प्राप्त करने के विकल्पों की पड़ताल की थी। लेकिन अमेरिका की हालिया बैठकों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि भारत का रणनीतिक प्रभाव घट गया है या किसी नए खनिज समझौते पर सहमति बन चुकी है।
क्या अमेरिका म्यांमार के साथ संबंध सामान्य कर रहा है?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी सीमित और मुद्दा-विशेष पर केंद्रित है। अमेरिका ने म्यांमार के सैन्य नेतृत्व से बातचीत की है, लेकिन उसने यह घोषणा नहीं की है कि वह प्रतिबंधों की व्यापक समीक्षा कर रहा है या संबंधों को पूरी तरह सामान्य बनाने जा रहा है। जापान ने भी बैठकों की मेजबानी के बावजूद म्यांमार की सैन्य समर्थित सरकार को औपचारिक मान्यता देने की घोषणा नहीं की है।
इसलिए अमेरिका की मौजूदा नीति को पूर्ण कूटनीतिक बदलाव के बजाय सीमित व्यावहारिक संपर्क के रूप में देखना अधिक सटीक होगा। आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि साइबर ठगी रोकने में कितना सहयोग मिलता है और क्या रेयर अर्थ जैसे रणनीतिक मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति होती है।



