चेन्नई में फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर की मौत, साइबर उत्पीड़न के आरोप में यूट्यूबर पर केस

चेन्नई में 27 वर्षीय फाइनेंशियल कंसल्टेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वी. हरीश की मौत के बाद ऑनलाइन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। हरीश सोशल मीडिया पर ‘Finance With Harish’ नाम से वित्त और निवेश से जुड़ी जानकारी साझा करते थे। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करीब 13 लाख फॉलोअर्स थे। 20 अक्टूबर 2026 को चेन्नई के मुत्तुकाडु इलाके में किराये के विला में उनका शव मिला। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पिता ने यूट्यूबर जेसन सैमुअल के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत
हरीश के पिता जे. विनायगम ने पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया कि उनके बेटे को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना बनाया जा रहा था। शिकायत में यूट्यूबर और Zemuria Inc. के सीईओ जेसन सैमुअल का नाम शामिल है। पिता का आरोप है कि सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और धमकियों के कारण हरीश मानसिक दबाव में थे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित मामला दर्ज किया है और आरोपों की जांच कर रही है।
सोशल मीडिया अकाउंट बंद होने को लेकर भी उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, हरीश के पुराने सोशल मीडिया अकाउंट सितंबर में बंद हो गए थे। इसके बाद उन्होंने नए अकाउंट के माध्यम से सामग्री साझा करना शुरू किया, लेकिन वे भी बंद कर दिए गए। उनके पिता ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन अभियान के कारण उनके बेटे की प्रतिष्ठा और काम प्रभावित हुए। पुलिस इस मामले में सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
जेसन सैमुअल ने आरोपों से किया इनकार
जेसन सैमुअल ने अपने ऊपर लगे साइबर उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने हरीश की वित्तीय सलाह देने की पात्रता और नियामकीय पंजीकरण को लेकर सवाल उठाए थे। सैमुअल ने दावा किया कि हरीश के पास भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) का पंजीकृत निवेश सलाहकार लाइसेंस नहीं था। उन्होंने हरीश की मौत पर दुख भी जताया है। ये दावे और आरोप जांच के विषय हैं; पुलिस ने अभी किसी की जिम्मेदारी को अंतिम रूप से स्थापित नहीं किया है।
पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों की कर रही जांच
चेन्नई पुलिस मामले से जुड़े सोशल मीडिया कंटेंट, शिकायत में लगाए गए आरोपों और संबंधित लोगों के बयानों की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके संबंध में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल मामले में सामने आए आरोपों को अदालत या जांच एजेंसी की अंतिम पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
ऑनलाइन उत्पीड़न को लेकर फिर उठी बहस
इस घटना ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक आलोचना, व्यक्तिगत आरोपों और ऑनलाइन उत्पीड़न के बीच अंतर को लेकर चर्चा तेज कर दी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, काम और मानसिक स्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव को गंभीरता से लेने की जरूरत है। साथ ही, वित्तीय सलाह से जुड़े दावों की जांच तथ्यों और नियामकीय नियमों के आधार पर होनी चाहिए। इस मामले में वास्तविक परिस्थितियां पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।



