तेहरान में असीम मुनीर को झटका! मोहसिन रेजाई ने ठुकराई अमेरिकी प्रस्ताव की उम्मीद

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर 20 अक्टूबर 2026 को ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे। उनके दौरे का प्रमुख उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू कराने के कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाना था। पाकिस्तान पहले भी दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है, लेकिन इस बार ईरान ने अपनी शर्तों पर स्पष्ट रुख अपनाया।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुनीर से बातचीत में कहा कि अमेरिका को प्रतिबंधों और दबाव से जुड़े कदमों पर पहले बदलाव करना होगा। ईरान का कहना है कि जब तक उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक अमेरिका के साथ वार्ता आगे बढ़ाना मुश्किल है।
मोहसिन रेजाई ने परमाणु सामग्री पर क्या कहा?
ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख के सामने स्पष्ट किया कि देश का संवर्धित परमाणु पदार्थ ईरान से बाहर नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने इसे ईरानी जनता की राष्ट्रीय संपत्ति बताया। यह बयान अमेरिका की उन मांगों से टकराता है, जिनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संवर्धन क्षमता को सीमित करने पर जोर दिया गया है।
रेजाई ने यह भी दोहराया कि अमेरिका के साथ बातचीत तभी आगे बढ़ सकती है, जब तेहरान की शर्तें पूरी हों और वाशिंगटन भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर हथियार बनाने के आरोपों से इनकार करता रहा है।
वीडियो में दिखा अलग-अलग अंदाज, बेइज्जती की चर्चा क्यों?
मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में असीम मुनीर और मोहसिन रेजाई की मुलाकात के दौरान दोनों के हावभाव की तुलना की गई। कुछ रिपोर्टों ने रेजाई के अपेक्षाकृत ठंडे व्यवहार को मुनीर की कूटनीतिक बेइज्जती के रूप में पेश किया। हालांकि, केवल चेहरे के भाव या अभिवादन के अंदाज से किसी बैठक की सफलता या असफलता का निष्कर्ष निकालना कठिन है।
दूसरी ओर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुनीर का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसलिए इस यात्रा का आकलन केवल एक वीडियो के आधार पर नहीं, बल्कि बैठकों के नतीजों और दोनों पक्षों के आधिकारिक बयानों के आधार पर करना चाहिए। <Cite refs={[“turn855868search6″,”turn855868search3”]}/>
अमेरिका के साथ बातचीत पर ईरान की सात शर्तें
ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता बहाल करने के लिए कई शर्तें रखी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इनमें ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करना, ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र में जारी संघर्षों को समाप्त करना शामिल है। तेहरान का कहना है कि पहले भरोसा बहाल करने वाले कदम उठाए जाने चाहिए।
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबफ ने भी कहा कि अमेरिका को तेहरान का विश्वास हासिल करने के लिए उसकी शर्तें पूरी करनी होंगी। इससे पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों के सामने चुनौती बढ़ गई है, क्योंकि अमेरिका और ईरान दोनों परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर अपने-अपने रुख पर कायम हैं।
सऊदी अरब और हूती हमलों का मुद्दा भी अहम
असीम मुनीर के दौरे को क्षेत्रीय सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में भी देखा जा रहा है। सऊदी अरब पर यमन के हूती समूह के हमलों और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर पाकिस्तान की चिंताएं हैं। पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए ईरान से भी संवाद जारी रखना चाहता है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से यह साबित नहीं होता कि ईरान ने पाकिस्तान के किसी विशेष अनुरोध को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। इतना स्पष्ट है कि क्षेत्रीय सुरक्षा, अमेरिका-ईरान संघर्ष और सऊदी अरब की चिंताएं इस कूटनीतिक प्रयास की पृष्ठभूमि में मौजूद हैं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता के सामने बड़ी चुनौती
पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संवाद बहाल कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास और परस्पर विरोधी मांगें किसी समझौते की राह कठिन बना रही हैं। मुनीर की यात्रा के दौरान ईरानी नेतृत्व ने बातचीत की संभावना पूरी तरह बंद करने के बजाय अपनी शर्तें पूरी करने पर जोर दिया।
इसलिए इस दौरे को पूरी तरह असफल घोषित करने के बजाय यह कहना अधिक सटीक होगा कि तत्काल किसी बड़े समझौते की घोषणा नहीं हुई और ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम तथा प्रतिबंधों पर कड़ा रुख दोहराया। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की मांगों पर कोई व्यावहारिक रास्ता निकाल पाते हैं या नहीं।



