
रूस-यूक्रेन युद्ध को लगभग तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं और यह संघर्ष अब भी दुनिया के सबसे बड़े भू-राजनीतिक संकटों में से एक बना हुआ है। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और अब फिर से चर्चाओं के केंद्र में आए डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को फोन किया। यही नहीं, ट्रंप ने NATO लीडर्स से भी बातचीत की, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई हलचल पैदा हो गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब युद्ध लगातार बढ़ते जा रहे नुकसान और मानवीय संकट की ओर इशारा कर रहा है।
ट्रंप और पुतिन की यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि ट्रंप पहले भी कई बार रूस-यूक्रेन युद्ध को 24 घंटे में खत्म करने का दावा कर चुके हैं। हालांकि उनके इस बयान को लेकर कई बार आलोचना भी हुई, लेकिन उनकी कोशिशों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या वास्तव में अमेरिका की मध्यस्थता से इस युद्ध का समाधान निकल सकता है। पुतिन और ट्रंप की मुलाकात के बाद जेलेंस्की को ट्रंप का फोन करना इस दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह संदेश देता है कि ट्रंप एक पुल (bridge) बनाने की कोशिश कर रहे हैं जिससे दोनों देशों के बीच संवाद की संभावना बढ़ सके।
दूसरी ओर, NATO देशों का इस संघर्ष में रोल हमेशा से ही निर्णायक रहा है। यूक्रेन को लगातार हथियार, फंडिंग और सामरिक सहयोग देने वाले NATO लीडर्स से ट्रंप की बातचीत बताती है कि वह एक व्यापक रणनीति के तहत सभी पक्षों को एक टेबल पर लाने की तैयारी में हैं। हालांकि NATO के कई सदस्य इस युद्ध को रोकने की बजाय रूस पर और अधिक दबाव बनाने की नीति के पक्षधर रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप किस तरह NATO को इस वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा बनाते हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध अब तक लाखों लोगों की जान ले चुका है और करोड़ों लोगों को शरणार्थी बनने पर मजबूर कर चुका है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर ऊर्जा संकट, खाद्य संकट और बढ़ती महंगाई के रूप में देखा जा चुका है। यूरोप में सुरक्षा की चिंता और अमेरिका-रूस के बीच तनाव ने भी वैश्विक शांति को खतरे में डाल दिया है। इन परिस्थितियों में अगर ट्रंप की पहल किसी समझौते की ओर बढ़ती है तो यह न सिर्फ रूस और यूक्रेन बल्कि पूरे विश्व के लिए एक राहत की खबर होगी।
फिलहाल सवाल यह है कि क्या पुतिन और जेलेंस्की किसी साझा मंच पर बातचीत करने को तैयार होंगे? क्या NATO देश इस पहल का समर्थन करेंगे या फिर इसे राजनीतिक स्टंट मानकर नकार देंगे? आने वाले दिनों में इन सवालों के जवाब मिलेंगे, लेकिन इतना तय है कि ट्रंप की इस सक्रियता ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अगर यह पहल आगे बढ़ती है तो संभव है कि वर्षों से चल रहा यह खूनी संघर्ष आखिरकार किसी ठोस नतीजे तक पहुंचे।



