धीरेंद्र शास्त्री की वृंदावन पदयात्रा: हिंदुओं से एकजुट होने का आह्वान, ब्रज में मांस-मदिरा की दुकानों पर रोक और यमुना शुद्धिकरण की मांग

वृंदावन, जोकि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाभूमि है, एक बार फिर अध्यात्म और भक्ति के रंग में रंगा दिखाई दिया। बागेश्वर धाम सरकार के मुख्य आचार्य पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यहां एक विशाल पदयात्रा और बैठक का आयोजन किया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु और संत-समाज शामिल हुआ। इस अवसर पर धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज को एकजुट होने का आह्वान किया और कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपनी धार्मिक परंपराओं और संस्कृति की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएँ।
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने उद्बोधन में विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र में मांस और मदिरा की दुकानों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात कही। उनका कहना था कि यह भूमि भगवान श्रीकृष्ण की पावन धरा है, यहाँ गौवंश की पूजा होती है और हर गली, हर सड़क श्रीकृष्ण की स्मृतियों से जुड़ी हुई है। ऐसे पावन क्षेत्र में मांस और मदिरा की बिक्री हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने प्रदेश और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर ठोस कदम उठाए जाएं और ब्रज को पूरी तरह से धार्मिक क्षेत्र घोषित किया जाए।
इसके साथ ही धीरेंद्र शास्त्री ने यमुना नदी की दुर्दशा पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी आस्था की धारा है। श्रीकृष्ण की लीलाओं का केंद्र यमुना आज प्रदूषण से कराह रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि यमुना शुद्धिकरण के लिए एक बड़ा जनांदोलन खड़ा किया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी यमुना के निर्मल जल और उसकी पवित्रता का अनुभव कर सकें।
बैठक में धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट कहा कि हिंदुओं को अब केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए भी आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक हम एकजुट नहीं होंगे, तब तक अपनी परंपराओं, आस्थाओं और धरोहरों की रक्षा नहीं कर पाएंगे।
इस पदयात्रा और बैठक में साधु-संतों के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और भक्तगण भी मौजूद रहे। वातावरण भक्ति और संकल्प के उत्साह से गूंज उठा। धीरेंद्र शास्त्री की इस पहल को ब्रज क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
वृंदावन की इस पदयात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि यदि हम सभी हिंदू समाज एक साथ खड़े हो जाएं, तो न केवल अपनी संस्कृति की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, धार्मिक और गौरवशाली विरासत भी सौंप सकते हैं।



