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हमें चाहिए युवा पीएम: Gen-Z की नई मांग से नेपाल की सियासत गरमाई, अब कौन बनेगा नया मुखिया?

नेपाल की राजनीति एक बार फिर से बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। इस बार मुद्दा सत्ता की खींचतान या गठबंधन की मजबूरी नहीं, बल्कि युवाओं की नई सोच और मांग है। नेपाल के Gen-Z वर्ग ने पहली बार संगठित होकर यह आवाज बुलंद की है कि देश को अब एक युवा प्रधानमंत्री चाहिए, जो नई पीढ़ी की सोच और आधुनिक विचारों के साथ देश को आगे ले जा सके। लंबे समय से नेपाल की सत्ता पर या तो वरिष्ठ नेताओं या फिर बुजुर्ग राजनेताओं का दबदबा रहा है, लेकिन अब नई पीढ़ी बदलाव चाहती है।

काठमांडू समेत नेपाल के कई हिस्सों में सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर युवाओं ने स्पष्ट संदेश दिया है कि देश को एक ऊर्जावान, प्रगतिशील और पारदर्शी नेतृत्व चाहिए। Gen-Z का मानना है कि अब पुराने नेताओं के वादों और परंपरागत राजनीति से देश आगे नहीं बढ़ पाएगा। बेरोजगारी, शिक्षा सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, और पलायन जैसी समस्याओं से जूझ रहे नेपाल को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है, जो टेक्नोलॉजी, रोजगार और आधुनिक विकास मॉडल को प्राथमिकता दे।

युवाओं की इस मांग से नेपाल की राजनीति में हलचल मच गई है। अब सवाल यह है कि मौजूदा पार्टियां इस मांग को कैसे पूरा करेंगी। कई बड़े दलों में आंतरिक खींचतान बढ़ गई है। वरिष्ठ नेता अपने-अपने गुटों को साधने में लगे हैं, जबकि युवा नेता अचानक से सुर्खियों में आ गए हैं। कम्युनिस्ट पार्टी, नेपाली कांग्रेस और माओवादी केंद्र – तीनों ही दल इस दबाव को महसूस कर रहे हैं कि यदि युवाओं को नजरअंदाज किया गया तो आने वाले चुनाव में उनका वोट बैंक खिसक सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल में युवा आबादी सबसे बड़ी ताकत है और उनकी राजनीतिक भागीदारी भविष्य की तस्वीर बदल सकती है। यही कारण है कि अब सियासी दल युवाओं के चेहरों को आगे लाने की रणनीति बनाने लगे हैं। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे केवल प्रतीकात्मक तौर पर युवाओं को मंच देंगे या वास्तव में प्रधानमंत्री पद जैसे शीर्ष पद पर किसी युवा को अवसर देंगे।

Gen-Z की यह पहल नेपाल की राजनीति के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकती है। अगर उनकी आवाज को अनसुना किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह विरोध और बड़ा रूप ले सकता है। वहीं अगर किसी युवा चेहरे को मौका मिलता है, तो यह नेपाल की सियासत में ऐतिहासिक बदलाव होगा। कुल मिलाकर, अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नेपाल का नया मुखिया कौन बनेगा – अनुभवी बुजुर्ग नेता या नई पीढ़ी का कोई युवा चेहरा।

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