मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित छन्नूलाल मिश्र को दी श्रद्धांजलि, कहा- भारतीय संगीत जगत ने खोया एक अमूल्य रत्न

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को भारत के प्रख्यात शास्त्रीय गायक और बनारस घराने के महान कलाकार पंडित छन्नूलाल मिश्र को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने वाराणसी स्थित उनके निवास पर जाकर परिजनों से मुलाकात की और गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पंडित जी के निधन से भारतीय संगीत जगत ने एक ऐसे युगपुरुष को खो दिया है, जिनकी कला और साधना ने न केवल बनारस की संगीत परंपरा को समृद्ध किया, बल्कि पूरे विश्व में भारतीय शास्त्रीय संगीत का मान बढ़ाया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पंडित छन्नूलाल मिश्र जैसे कलाकार युगों-युगों में पैदा होते हैं। उन्होंने अपने गायन से न केवल संगीत साधना को नई ऊंचाइयां दीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, भक्ति और अध्यात्म को भी सुरों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित जी की रचनाएं और उनका संगीत आज भी हर संगीत प्रेमी के हृदय में गूंजता है। उनका जाना एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई असंभव है।
मुख्यमंत्री ने पंडित जी के परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि राज्य सरकार हमेशा उनके परिवार के साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सरकार पंडित जी की स्मृति को जीवित रखने के लिए उनके नाम पर सांस्कृतिक संस्थान या संगीत अकादमी की स्थापना पर विचार करेगी। इससे नई पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय संगीत की उस परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिसे पंडित जी ने जीवनभर साधा।
गौरतलब है कि पंडित छन्नूलाल मिश्र भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक ऐसे स्तंभ थे जिनकी पहचान केवल उनके गायन तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, भक्ति संगीत और काशी की लोक परंपरा के जीवंत प्रतीक थे। उनकी गायकी में भगवान शिव, मां गंगा और भक्ति रस का अनोखा संगम देखने को मिलता था। उन्हें भारत सरकार द्वारा ‘पद्म भूषण’ सम्मान से भी नवाजा गया था।
श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पंडित जी ने संगीत को पूजा का माध्यम बनाया और अपनी साधना के जरिए पूरी दुनिया को भारतीय संगीत की गहराई से परिचित कराया। उनकी आवाज़ में जो मिठास, गंभीरता और अध्यात्म का संगम था, वह अब दुर्लभ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित छन्नूलाल मिश्र का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा। उन्होंने जो मार्ग दिखाया है, उस पर चलकर नई पीढ़ी भारतीय संगीत को और ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित जी की स्मृतियां, उनका संगीत और उनका योगदान सदा अमर रहेगा। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची साधना कभी व्यर्थ नहीं जाती। बनारस की धरती पर उन्होंने जो सुरों की गंगा बहाई, वह अनंत काल तक बहती रहेगी।



