मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित छन्नूलाल मिश्र को दी श्रद्धांजलि, परिजनों से मिलकर जताई गहरी संवेदना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बनारस के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने उनके निवास पर पहुंचकर परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन न केवल संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए भी गहरा आघात है। योगी ने कहा कि पंडित जी ने अपने गायन के माध्यम से काशी की परंपरा, भक्ति और संगीत की आत्मा को सजीव रखा था।
मुख्यमंत्री ने परिजनों से मुलाकात के दौरान कहा कि पंडित छन्नूलाल मिश्र जैसे महान कलाकारों के कारण ही भारत की संगीत परंपरा आज भी जीवंत और गौरवशाली है। उनके भजनों और ठुमरियों ने भारतीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई। योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि सरकार पंडित जी के योगदान को सदा याद रखेगी और उनके नाम पर किसी सांस्कृतिक संस्थान या संगीत केंद्र की स्थापना पर विचार किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उनसे प्रेरणा ले सकें।
पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म वाराणसी में हुआ था और वे बनारस घराने के प्रमुख शास्त्रीय गायकों में से एक थे। उन्होंने अपने जीवन में भक्ति संगीत, ठुमरी, दादरा और कजरी जैसी विधाओं को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनके गायन में भक्ति की गहराई, भावनाओं की मधुरता और सुरों की आत्मीयता झलकती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई अवसरों पर उनके गायन की प्रशंसा कर चुके हैं और काशी को उनका घर कहा करते थे।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पंडित जी केवल एक कलाकार नहीं थे, बल्कि वे भारतीय संस्कृति के संवाहक थे। उनका संगीत जीवन के हर भाव को छूता था — चाहे वह भक्ति हो, विरह हो या उत्सव। उनकी प्रस्तुतियों में ‘गंगा मैया’, ‘शिव भक्ति’ और ‘राम नाम’ की गूंज सुनाई देती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी की पहचान पंडित छन्नूलाल मिश्र जैसे संत-स्वरूप कलाकारों से ही है, जिन्होंने शहर की आत्मा को दुनिया तक पहुंचाया।
योगी ने कहा कि राज्य सरकार संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का प्रयास करेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंडित जी की स्मृति में एक वार्षिक संगीत समारोह का आयोजन किया जाए, जिसमें युवा कलाकारों को मंच मिल सके।
श्रद्धांजलि के अंत में मुख्यमंत्री ने परिवार को सांत्वना देते हुए कहा कि सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है। पंडित छन्नूलाल मिश्र भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संगीत और उनकी शिक्षाएँ सदैव जीवित रहेंगी, जो आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति की धरोहर से जोड़े रखेंगी।



