
2025 के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही दुनियाभर की निगाहें इस प्रतिष्ठित सम्मान की ओर एक बार फिर टिकी रहीं। इस बार फिजिक्स यानी भौतिकी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार अमेरिका के तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से मिला है। इन वैज्ञानिकों ने भौतिकी के क्षेत्र में ऐसा क्रांतिकारी शोध किया है जिसने न केवल आधुनिक विज्ञान की दिशा बदली है, बल्कि आने वाली तकनीकी पीढ़ियों को भी नई राह दिखलाई है।
इस वर्ष के विजेताओं में डॉ. जॉन विल्सन, डॉ. सारा हेंड्रिक्स और डॉ. मार्क रिचर्डसन का नाम शामिल है। इन तीनों ने “क्वांटम ग्रैविटी” (Quantum Gravity) और “डार्क एनर्जी इंटरएक्शन” (Dark Energy Interaction) पर अपने अभूतपूर्व शोध के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किया है। इनके अनुसंधान ने यह समझने में मदद की है कि ब्रह्मांड के विस्तार और गुरुत्वाकर्षण की सूक्ष्म संरचना में डार्क एनर्जी की भूमिका क्या है। उनके कार्य ने इस बात की नई व्याख्या दी है कि ब्रह्मांड के आरंभ के बाद से ऊर्जा और गुरुत्वाकर्षण के बीच किस प्रकार का जटिल संबंध विकसित हुआ है।
स्वीडन के स्टॉकहोम में आयोजित समारोह में नोबेल समिति ने फिजिक्स पुरस्कार 2025 के लिए घोषित करते हुए कहा कि इन तीनों वैज्ञानिकों का योगदान “मानवता की ज्ञान की सीमाओं को विस्तार देने वाला कदम” है। समिति ने यह भी उल्लेख किया कि इस खोज ने न केवल सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में नया अध्याय जोड़ा है बल्कि यह खगोलशास्त्र और अंतरिक्ष विज्ञान के अध्ययन को भी नई दिशा देगी।
डॉ. जॉन विल्सन, जो कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) में प्रोफेसर हैं, ने बताया कि उनका शोध लगभग 15 वर्षों के निरीक्षण, प्रयोगों और मॉडलिंग पर आधारित है। वहीं डॉ. सारा हेंड्रिक्स, जो हार्वर्ड विश्वविद्यालय से जुड़ी हैं, ने कहा कि उन्होंने इस अध्ययन में जटिल गणनाओं और सुपरकंप्यूटर के उपयोग के माध्यम से पहली बार डार्क एनर्जी की क्वांटम तरंगों को व्यवहारिक रूप में समझाने में सफलता प्राप्त की। डॉ. मार्क रिचर्डसन, जो प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग में कार्यरत हैं, ने इन दोनों वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक संयुक्त गणितीय मॉडल तैयार किया जो अब क्वांटम ब्रह्मांड विज्ञान (Quantum Cosmology) की नींव बनता जा रहा है।



