
नेपाल में हाल ही में हुए युवा प्रदर्शनों के बाद अब एक और देश में Gen-Z का गुस्सा फूट पड़ा है। हजारों की संख्या में युवा सड़कों पर उतर आए हैं और राष्ट्रपति के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। युवा पीढ़ी का कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रही है और देश में बढ़ती बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और महंगाई ने आम लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। सोशल मीडिया पर शुरू हुआ यह आंदोलन कुछ ही दिनों में बड़े पैमाने पर फैल गया और अब यह एक राष्ट्रीय विरोध में बदल चुका है।
राष्ट्रपति और सरकार पर आरोप है कि वे युवाओं की आवाज़ सुनने को तैयार नहीं हैं। प्रशासनिक फैसलों, आर्थिक नीतियों और राजनीतिक दबावों ने जनता में असंतोष को और बढ़ा दिया है। Gen-Z के इन प्रदर्शनों में कॉलेज छात्र, नौकरी की तलाश में युवा और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। इनके हाथों में प्लेकार्ड, राष्ट्रीय झंडे और संविधान से जुड़े नारे दिखाई दे रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार तत्काल रूप से आर्थिक सुधारों की दिशा में कदम उठाए, पारदर्शिता बढ़ाए और युवाओं के लिए नई रोजगार योजनाओं की घोषणा करे। कई जगहों पर भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग भी करना पड़ा, जिसके चलते हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। सोशल मीडिया वीडियो और लाइव स्ट्रीम ने इस विरोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। दुनिया भर से लोग Gen-Z की जागरूकता और उनके साहस की तारीफ कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन सिर्फ किसी एक मुद्दे का परिणाम नहीं है, बल्कि कई वर्षों से पनप रहे असंतोष की अभिव्यक्ति है। युवा वर्ग बदलाव चाहता है और अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। उनका कहना है कि यदि वर्तमान नेतृत्व उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से सरकार पर दबाव बनाते रहेंगे।
सरकार ने फिलहाल बातचीत के संकेत दिए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी ठोस कदमों की मांग कर रहे हैं। आंदोलन की गति और युवाओं की एकजुटता को देखते हुए यह विरोध जल्दी थमता दिखाई नहीं दे रहा है। नेपाल के बाद इस देश में भी Gen-Z का जागरण वैश्विक राजनीति में युवाओं की शक्ति का स्पष्ट संकेत है।



