रुद्रप्रयाग बाईपास खुला, चारधाम यात्रियों को 22 साल बाद राहत

चारधाम यात्रा के लिहाज से महत्वपूर्ण रुद्रप्रयाग बाईपास परियोजना का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। परियोजना के दूसरे चरण का निर्माण पूरा होने के बाद पुल और सुरंग से होकर वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निरीक्षण के बाद मार्ग को फिलहाल खोलने की जानकारी दी। हालांकि, परियोजना का विधिवत लोकार्पण नवंबर में किए जाने की संभावना है।
केदारनाथ-बदरीनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत
चारधाम यात्रा के दौरान रुद्रप्रयाग शहर में वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है। बदरीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के वाहन बाजार और मुख्य मार्गों से गुजरते हैं, जिससे कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। बाईपास शुरू होने के बाद इन दोनों धामों की ओर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्ता मिलेगा। इससे शहर के अंदर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।
900 मीटर से अधिक लंबी सुरंग और अलकनंदा पर पुल
बाईपास के दूसरे चरण में लगभग 900 मीटर लंबी सुरंग और अलकनंदा नदी पर करीब 190 से 200 मीटर लंबे मोटर पुल का निर्माण किया गया है। इस हिस्से से केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के बीच संपर्क बेहतर होगा। सुरंग के अंदर सड़क, बिजली, वेंटिलेशन और सुरक्षा संबंधी जरूरी कार्य पूरे किए गए हैं। पुल की लोड टेस्टिंग और अन्य तकनीकी जांच भी कराई गई हैं।
156 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ दूसरा चरण
रुद्रप्रयाग बाईपास परियोजना को वर्ष 2003-04 में मंजूरी मिली थी। पहले चरण का काम पूरा होने के बाद दूसरे चरण के लिए बजट स्वीकृत नहीं होने के कारण परियोजना लंबे समय तक अटकी रही। वर्ष 2021 में दूसरे चरण को मंजूरी मिली और दिसंबर 2022 में करीब 156 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण शुरू हुआ। निर्धारित समयसीमा कई बार आगे बढ़ने के बाद अब यह मार्ग वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया है।
रुद्रप्रयाग और चमोली के लोगों को भी होगा फायदा
बाईपास का लाभ केवल चारधाम यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के स्थानीय निवासियों को भी आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। शहर के बाजार और मुख्य चौराहों पर वाहनों का दबाव घटने से स्थानीय व्यापार, रोजमर्रा की आवाजाही और जरूरी सेवाओं को मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक राहत कितनी होगी, यह नियमित यातायात शुरू होने और वाहनों के नए मार्ग का उपयोग करने पर निर्भर करेगा।
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़क मार्ग से केदारनाथ और बदरीनाथ पहुंचते हैं। ऐसे में रुद्रप्रयाग जैसे प्रमुख यातायात केंद्रों पर जाम कम करना जरूरी है। बाईपास परियोजना से यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा और शहर के भीतर यातायात व्यवस्थित करने में सहायता मिल सकती है। लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना के शुरू होने से स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।



