
नासा (NASA) ने साल 2026 का पहला निर्धारित स्पेसवॉक अचानक रद्द कर दिया, जिससे अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वालों के बीच कई सवाल खड़े हो गए। यह स्पेसवॉक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर तैनात अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा किया जाना था, जिसमें स्टेशन के बाहरी हिस्से की मरम्मत और कुछ वैज्ञानिक उपकरणों की जांच शामिल थी। लेकिन ऐन वक्त पर नासा ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस महत्वपूर्ण गतिविधि को टालने का फैसला लिया।
नासा की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, स्पेसवॉक रद्द करने का मुख्य कारण स्पेससूट से जुड़ी तकनीकी समस्या रही। जांच के दौरान पाया गया कि अंतरिक्ष यात्री के सूट के एक हिस्से में प्रेशर और कूलिंग सिस्टम से संबंधित असामान्य रीडिंग सामने आई। स्पेसवॉक के दौरान स्पेससूट ही अंतरिक्ष यात्री की जीवनरेखा होता है, क्योंकि वही उन्हें वैक्यूम, अत्यधिक तापमान और रेडिएशन से बचाता है। ऐसे में किसी भी तरह की छोटी खामी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
नासा ने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। भले ही यह स्पेसवॉक वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद अहम था, लेकिन जोखिम को देखते हुए इसे आगे के लिए स्थगित कर दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले भी कई बार तकनीकी या मौसम संबंधी कारणों से स्पेसवॉक टाले जा चुके हैं और यह अंतरिक्ष अभियानों का सामान्य हिस्सा है।
इस स्पेसवॉक के दौरान ISS के सोलर पैनल सिस्टम और कुछ कम्युनिकेशन उपकरणों की जांच की जानी थी। अब नासा की इंजीनियरिंग टीम स्पेससूट की विस्तृत जांच कर रही है और समस्या के पूरी तरह समाधान के बाद ही नई तारीख तय की जाएगी। नासा ने यह भी कहा है कि अंतरिक्ष स्टेशन की मौजूदा स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है और किसी तरह का तत्काल खतरा नहीं है।
अंतरिक्ष विशेषज्ञों के मुताबिक, इस फैसले से यह साफ होता है कि नासा अपने मिशनों में “सेफ्टी फर्स्ट” नीति पर सख्ती से अमल करता है। स्पेसवॉक भले ही रोमांचक और जरूरी हों, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल सकती है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नासा अगला स्पेसवॉक कब और किन तैयारियों के साथ करेगा।



