
ईरान का चाबहार पोर्ट भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों ही दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। यह पोर्ट भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा व्यापारिक रास्ता उपलब्ध कराता है, जिससे पाकिस्तान पर निर्भरता खत्म होती है। इसी वजह से चाबहार पोर्ट को भारत की विदेश नीति में खास स्थान दिया गया है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भी चाबहार पोर्ट परियोजना को बिना शर्त छूट दी थी, ताकि अफगानिस्तान तक मानवीय और व्यापारिक सहायता जारी रह सके। यह छूट दिखाती है कि अमेरिका भी इस परियोजना के रणनीतिक महत्व को समझता है।
वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर लगातार बातचीत जारी है। भारत का मानना है कि चाबहार पोर्ट क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापार विस्तार और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है। वहीं ईरान के साथ सहयोग से भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति भी मजबूत होती है।
चाबहार पोर्ट न केवल भारत के आर्थिक हितों को साधता है, बल्कि चीन के ग्वादर पोर्ट के प्रभाव को संतुलित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसी कारण यह परियोजना आने वाले वर्षों में भारत की रणनीति का अहम हिस्सा बनी रहेगी।



