
भारत सरकार ने विदेशों में छिपे भारतीय भगोड़ों और आर्थिक अपराधियों के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त और व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 70 से अधिक ऐसे भगोड़े अपराधी हैं जो करोड़ों-अरबों रुपये की धोखाधड़ी, बैंक घोटाले, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गंभीर आर्थिक अपराधों में वांछित हैं। इन सभी को भारत वापस लाने के लिए सरकार ने बहु-स्तरीय रणनीति अपनाई है, जिसमें कूटनीतिक दबाव, कानूनी प्रक्रियाएं और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का सहयोग शामिल है।
सरकार इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस, प्रत्यर्पण संधियों (Extradition Treaties) और म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) के जरिए इन भगोड़ों पर शिकंजा कस रही है। खास बात यह है कि कई देशों के साथ भारत के रिश्ते मजबूत होने का सीधा फायदा अब इस अभियान में दिख रहा है। यूके, यूएई, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और कुछ यूरोपीय देशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो चुकी है। कुछ मामलों में संपत्तियों की कुर्की भी शुरू कर दी गई है, ताकि अपराध से अर्जित धन को जब्त किया जा सके।
सरकार का साफ संदेश है कि देश का पैसा लूटकर विदेश भागने वालों के लिए अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचेगा। हाल के वर्षों में विजय माल्या, नीरव मोदी और अन्य बड़े नामों के मामलों ने यह साबित किया है कि प्रक्रिया भले लंबी हो, लेकिन भारत अब पीछे हटने वाला नहीं है। एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, डेटा शेयरिंग और डिजिटल ट्रैकिंग ने इस अभियान को और मजबूत बनाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न सिर्फ कानून के राज को मजबूत करेगा, बल्कि देश की आर्थिक व्यवस्था में जनता का भरोसा भी बढ़ाएगा। साथ ही, इससे भविष्य में आर्थिक अपराध करने वालों को कड़ा संदेश जाएगा कि अपराध करके विदेश भागना अब आसान नहीं है। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—हर भगोड़े को न्याय के कटघरे तक लाना और देश के संसाधनों की एक-एक पाई वापस दिलाना।



