अमेरिकी बाजार में गूंजेगा ‘मेक इन यूपी’; टेक्सटाइल, लेदर और कृषि निर्यात पर टैरिफ में राहत

अमेरिकी बाजार में ‘मेक इन यूपी’ का असर अब और तेज दिखाई दे सकता है। टेक्सटाइल, लेदर और कृषि उत्पादों के निर्यात पर टैरिफ में संभावित कमी से उत्तर प्रदेश के उद्यमियों और निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से उद्योग जगत की मांग रही है कि भारतीय उत्पादों को अमेरिका जैसे बड़े बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा का मौका मिले, और अब हालिया व्यापारिक सहमतियों के बाद माहौल अनुकूल बनता नजर आ रहा है। टैरिफ घटने का सीधा फायदा यह होगा कि यूपी में तैयार कपड़ा, चमड़े के उत्पाद, फुटवियर, हैंडीक्राफ्ट और एग्री कमोडिटीज कीमत के मामले में ज्यादा आकर्षक बनेंगी, जिससे ऑर्डर बढ़ सकते हैं।
राज्य सरकार पहले ही ‘मेक इन यूपी’ और निर्यात प्रोत्साहन नीति के जरिए बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स, क्वालिटी कंट्रोल और सर्टिफिकेशन पर जोर दे रही है। ऐसे में टैरिफ में राहत मिलने से इन प्रयासों को नई रफ्तार मिलेगी। खासतौर पर कानपुर का लेदर क्लस्टर, नोएडा और गाजियाबाद का टेक्सटाइल व गारमेंट हब, मुरादाबाद का ब्रास वर्क और पूर्वांचल के कृषि उत्पादों को बड़ा फायदा हो सकता है। निर्यात बढ़ने से न सिर्फ उद्योगों का उत्पादन बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिकी खरीदार कीमत और गुणवत्ता—दोनों को देखते हैं। यूपी के उत्पाद पहले ही अपनी कारीगरी और वैल्यू के लिए पहचान रखते हैं, लेकिन टैरिफ ज्यादा होने से कई बार वे प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाते थे। यदि शुल्क में कमी आती है तो भारतीय कंपनियां बेहतर मार्जिन के साथ बड़े पैमाने पर सप्लाई कर सकेंगी। इससे छोटे और मझोले उद्योगों को भी वैश्विक सप्लाई चेन में जगह बनाने का मौका मिलेगा। साथ ही, विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और वे यूपी में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए आगे आ सकते हैं।
कृषि क्षेत्र की बात करें तो चावल, फल-सब्जियां, प्रोसेस्ड फूड और डेयरी से जुड़े उत्पादों की मांग अमेरिका में लगातार बढ़ रही है। टैरिफ कम होने से किसान उत्पादक संगठनों और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों को निर्यात का नया बाजार मिल सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को भी बल मिलेगा। कुल मिलाकर, यह बदलाव उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख निर्यात इंजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है, जहां ‘मेक इन यूपी’ का नारा सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुंचेगा।



