
कनाडा के एक स्कूल में हुई ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार इस दर्दनाक हमले में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और स्कूल परिसर को सील कर जांच शुरू कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां हमलावर की पहचान, उसके मकसद और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वह अकेला था या उसके साथ कोई और भी शामिल था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गोलियों की आवाज से स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और बच्चे व शिक्षक अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
इस हृदयविदारक घटना पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरा दुख जताया है। उन्होंने शोक संदेश जारी करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। पीएम मोदी ने कहा कि इस कठिन समय में भारत कनाडा के लोगों के साथ खड़ा है। विश्व के कई अन्य नेताओं ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे मानवता पर हमला बताया है।
कनाडा में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी घटनाओं ने सरकारों और समाज दोनों को सोचने पर मजबूर किया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए और क्या कदम उठाए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ कड़े कानून ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और हथियारों तक पहुंच को नियंत्रित करने जैसे मुद्दों पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
फिलहाल पूरे देश में शोक का माहौल है। लोग मोमबत्तियां जलाकर मृतकों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं और पीड़ित परिवारों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हिंसा का कोई समाधान नहीं होता और समाज को मिलकर ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए प्रयास करना होगा।



