सदन में ब्रजेश पाठक का बड़ा खुलासा, 178 निजी अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त

उत्तर प्रदेश में मानकों के विपरीत संचालित हो रहे निजी अस्पतालों पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। विधानसभा में जानकारी देते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि प्रदेश भर में चलाए गए व्यापक अभियान के तहत 178 निजी अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं, जबकि 533 अस्पतालों को सीज करने की कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और जो संस्थान तय मानकों, पंजीकरण नियमों तथा चिकित्सीय प्रोटोकॉल का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कठोर कदम आगे भी जारी रहेंगे।
डिप्टी सीएम ने सदन को अवगत कराया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार निरीक्षण, शिकायतों की जांच और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। कई अस्पताल बिना आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टरों, प्रशिक्षित स्टाफ, उपकरणों या आपातकालीन सुविधाओं के संचालित पाए गए। ऐसे मामलों में पहले नोटिस दिया गया, सुधार का अवसर भी प्रदान किया गया, लेकिन निर्देशों की अनदेखी करने पर लाइसेंस निरस्तीकरण और सीज की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि प्रदेश में इलाज की व्यवस्था पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बने, ताकि आम जनता को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
ब्रजेश पाठक ने यह भी कहा कि जिन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, वहां भर्ती मरीजों को दूसरे मान्यता प्राप्त संस्थानों में शिफ्ट कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जिससे किसी को असुविधा न हो। साथ ही, भविष्य में पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया को और सख्त बनाया जाएगा। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है और अनियमितताओं पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है।
सरकार की इस कार्रवाई को स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे निजी अस्पतालों में नियमों के पालन की गंभीरता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर, भरोसेमंद इलाज मिल सकेगा। विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए डिप्टी सीएम ने दोहराया कि जहां भी शिकायत मिलेगी, वहां जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।



