तनाव और एंग्जायटी से राहत पाने के लिए अपनाएं 5 मिनट की टैपिंग तकनीक

तनाव, चिंता और बेचैनी का असर व्यक्ति के मन के साथ-साथ उसकी दिनचर्या पर भी पड़ सकता है। काम का दबाव, पारिवारिक समस्याएं और भविष्य की चिंता कई बार मानसिक थकान बढ़ा देती हैं। ऐसी स्थिति में कुछ लोग टैपिंग तकनीक का सहारा लेते हैं। इसे इमोशनल फ्रीडम टेक्नीक यानी EFT कहा जाता है। इसमें व्यक्ति अपनी परेशानी पर ध्यान केंद्रित करते हुए चेहरे और शरीर के कुछ निर्धारित बिंदुओं पर उंगलियों से हल्की थपथपाहट करता है।
कैसे करें टैपिंग तकनीक?
इस तकनीक को आजमाने के लिए शांत जगह पर बैठें और कुछ पल अपनी सांसों पर ध्यान दें। इसके बाद यह पहचानने की कोशिश करें कि इस समय आपको किस बात से तनाव या चिंता हो रही है।
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पहला चरण: अपनी परेशानी और उससे जुड़ी भावना को पहचानें।
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दूसरा चरण: अपनी भावना को स्वीकार करते हुए खुद से सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्ण शब्द कहें।
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तीसरा चरण: माथे, भौंहों के पास, आंखों के किनारे और ठुड्डी जैसे EFT में बताए जाने वाले बिंदुओं पर उंगलियों से धीरे-धीरे टैप करें।
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चौथा चरण: इस दौरान अपनी सांसों को सामान्य रखें और कुछ मिनट तक अपनी भावनाओं पर ध्यान दें।
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पांचवां चरण: अभ्यास के बाद देखें कि आपकी बेचैनी में कोई बदलाव महसूस हुआ है या नहीं।
ध्यान रखें कि टैपिंग के लिए कोई निश्चित पांच मिनट की अवधि सभी लोगों पर समान रूप से प्रभावी साबित नहीं हुई है।
क्या टैपिंग से तनाव और एंग्जायटी में राहत मिलती है?
कुछ छोटे अध्ययनों में EFT टैपिंग से तनाव और चिंता के लक्षणों में संभावित सुधार देखा गया है। हालांकि, उपलब्ध शोध की गुणवत्ता और परिणामों को लेकर सीमाएं हैं। इसलिए यह दावा करना सही नहीं होगा कि टैपिंग हर व्यक्ति को पांच मिनट में राहत दे सकती है। धीमी और गहरी सांस लेना, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और भरोसेमंद लोगों से बातचीत करना भी तनाव प्रबंधन में सहायक हो सकता है।
कब लेनी चाहिए विशेषज्ञ की मदद?
अगर तनाव या एंग्जायटी लंबे समय तक बनी रहती है, नींद प्रभावित होती है या रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसी प्रमाण-आधारित थेरेपी चिंता से निपटने में मदद कर सकती हैं। टैपिंग तकनीक को चाहें तो सहायक अभ्यास के रूप में आजमा सकते हैं, लेकिन इसे जरूरी उपचार का विकल्प न बनाएं।
महत्वपूर्ण: टैपिंग तकनीक से मिलने वाली राहत व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग हो सकती है। लगातार या गंभीर चिंता की स्थिति में विशेषज्ञ की मदद लेना सबसे उचित कदम है।



