
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज असम से ‘वाइब्रेंट विलेज-2’ कार्यक्रम का शुभारंभ करने जा रहे हैं। यह पहल सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। सरकार का मानना है कि देश की सीमाओं पर बसे गांव केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामरिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों का सशक्त और आत्मनिर्भर बनना राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के पहले चरण में कई सीमावर्ती गांवों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया गया था। अब ‘वाइब्रेंट विलेज-2’ के तहत इन प्रयासों को और व्यापक बनाया जाएगा। असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों के कई बॉर्डर गांवों में पर्यटन, हस्तशिल्प, कृषि आधारित उद्योग और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देने की योजना है, जिससे वहां के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।
सरकार का लक्ष्य है कि सीमावर्ती गांवों से पलायन को रोका जाए और लोगों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर जीवन सुविधाएं उपलब्ध हों। बेहतर सड़क नेटवर्क, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों के विस्तार से इन इलाकों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। साथ ही स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए विकास मॉडल तैयार किया जाएगा।
असम से इस कार्यक्रम की शुरुआत करना रणनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पूर्वोत्तर भारत की सीमाएं कई देशों से लगती हैं। ऐसे में यहां का विकास राष्ट्रीय प्राथमिकता का हिस्सा है। ‘वाइब्रेंट विलेज-2’ के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि सीमा पर रहने वाले नागरिक देश के विकास के केंद्र में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो यह सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने, कौशल विकास कार्यक्रम चलाने और डिजिटल सेवाओं के विस्तार से इन गांवों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, ‘वाइब्रेंट विलेज-2’ सीमावर्ती गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो सुरक्षा और समृद्धि—दोनों लक्ष्यों को साधने का प्रयास है।



