
साल 1965 का भारत-पाक युद्ध देश के इतिहास का एक अहम और संवेदनशील अध्याय है। इस युद्ध ने न केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों की वीरता को उजागर किया, बल्कि कई राजनीतिक और नागरिक हस्तियों को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ी। इसी दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता की एक दुखद घटना में मृत्यु हो गई, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
सितंबर 1965 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच भीषण युद्ध जारी था, उस समय पाकिस्तानी वायुसेना ने भारतीय सीमावर्ती इलाकों में हमले तेज कर दिए थे। 19 सितंबर 1965 को मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता अपनी पत्नी और कुछ सहयोगियों के साथ एक छोटे विमान से कच्छ क्षेत्र का दौरा कर रहे थे। उनका उद्देश्य युद्ध प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लेना और स्थानीय प्रशासन से बातचीत करना था।
इसी दौरान पाकिस्तानी लड़ाकू विमान ने उनके विमान को निशाना बना लिया। बताया जाता है कि बिना किसी चेतावनी के नागरिक विमान पर हमला किया गया। यह हमला अंतरराष्ट्रीय मानकों और युद्ध के नियमों के विरुद्ध माना गया। विमान को मार गिराया गया, जिसमें सवार सभी लोगों की मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी।
मुख्यमंत्री की शहादत ने यह स्पष्ट कर दिया कि 1965 का युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका प्रभाव राजनीतिक नेतृत्व तक भी पहुंच गया था। इस ‘नापाक’ हरकत को भारत ने कड़े शब्दों में निंदा की और इसे कायरतापूर्ण कदम बताया। उस समय देशभर में शोक की लहर दौड़ गई और बलवंतराय मेहता को एक समर्पित जननेता के रूप में याद किया गया।
आज, 60 साल बाद भी यह घटना हमें याद दिलाती है कि युद्ध की आग कितनी व्यापक तबाही ला सकती है। 1965 का युद्ध भारत की सैन्य दृढ़ता और नेतृत्व के साहस का प्रतीक बना, वहीं गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री की शहादत इतिहास में एक दर्दनाक स्मृति के रूप में दर्ज है।



