काशी हिंदू विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ का 29वां दीक्षांत समारोह संपन्न

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ का 29वां दीक्षांत एवं शिष्योपनयनीय संस्कार समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। इस अवसर पर देशभर से आए आयुर्वेद के विद्वान, छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अतिथि उपस्थित रहे। समारोह का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से सम्मानित करना और उन्हें समाज सेवा के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुई, जिससे पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बन गया।
समारोह के दौरान सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र और उपाधियां प्रदान की गईं। साथ ही शिष्योपनयनीय संस्कार के माध्यम से विद्यार्थियों को आयुर्वेद की परंपराओं और मूल्यों से जुड़ने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति ही नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान समय में जब लोग प्राकृतिक और समग्र स्वास्थ्य पद्धतियों की ओर लौट रहे हैं, तब आयुर्वेद की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों और अतिथियों ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में उनकी जिम्मेदारी केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि समाज में स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता फैलाना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीक के साथ आयुर्वेद को जोड़ने की सलाह दी, ताकि यह चिकित्सा पद्धति वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावी बन सके।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ की उपलब्धियों और योगदान पर प्रकाश डाला। बताया गया कि संस्थान पिछले कई वर्षों से आयुर्वेद के क्षेत्र में उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और शोध कार्यों को बढ़ावा दे रहा है। यहां से प्रशिक्षित विद्यार्थी देश के विभिन्न हिस्सों में आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं और पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
समारोह के अंत में सभी विद्यार्थियों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने और आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प दिलाया गया। इस आयोजन ने न केवल विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का क्षण प्रदान किया, बल्कि आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार और उसके महत्व को भी नई ऊर्जा दी।



