उत्तर प्रदेश में मोटे अनाजों का उत्पादन घटा, बाजरा और ज्वार की खेती को लगा झटका

उत्तर प्रदेश में मोटे अनाजों के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे बाजरा और ज्वार जैसी प्रमुख फसलों की खेती को झटका लगा है। कृषि क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों और विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार उत्पादन में आई कमी ने किसानों और नीति निर्माताओं दोनों का ध्यान आकर्षित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में बदलाव, वर्षा की अनिश्चितता, खेती के रकबे में कमी और किसानों का अन्य अधिक लाभकारी फसलों की ओर रुझान इस गिरावट के प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं। कई क्षेत्रों में किसानों ने पारंपरिक मोटे अनाजों की बजाय दूसरी नकदी फसलों को प्राथमिकता दी है।
बाजरा और ज्वार को पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के वर्षों में मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाए गए हैं, क्योंकि ये फसलें कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती हैं और जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ कृषि का विकल्प मानी जाती हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन में गिरावट को रोकने के लिए किसानों को बेहतर बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, सिंचाई सुविधाएं और बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना आवश्यक है। साथ ही मोटे अनाजों की खरीद और मूल्य समर्थन से जुड़े उपाय भी किसानों को प्रोत्साहित कर सकते हैं।
राज्य सरकार और कृषि विभाग की ओर से मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य किसानों को ऐसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है जो पोषण सुरक्षा और कृषि स्थिरता दोनों में योगदान देती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो मोटे अनाजों का उत्पादन और प्रभावित हो सकता है। वहीं उचित नीति समर्थन और जागरूकता के माध्यम से बाजरा, ज्वार तथा अन्य मोटे अनाजों की खेती को फिर से गति दी जा सकती है।



