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यूपी में 99% शिकायतों के निस्तारण का दावा, फिर भी क्यों झेल रहे उपभोक्ता बिजली के झटके?

उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग की ओर से दावा किया जा रहा है कि उपभोक्ताओं की लगभग 99 प्रतिशत शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। इसके बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों से बिजली कटौती, लो-वोल्टेज, ट्रिपिंग और अनियमित आपूर्ति की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायतों को तकनीकी रूप से बंद तो कर दिया जाता है, लेकिन कई बार समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाता। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में विशेष रूप से वोल्टेज की समस्या, बार-बार बिजली बाधित होना और उपकरणों के खराब होने जैसी शिकायतें देखने को मिलती हैं।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि शिकायतों के निस्तारण के आंकड़े और उपभोक्ताओं के वास्तविक अनुभवों के बीच अंतर कई कारणों से हो सकता है। इनमें वितरण नेटवर्क पर बढ़ता दबाव, पुराने विद्युत ढांचे, स्थानीय तकनीकी खामियां और मांग के मुकाबले आपूर्ति प्रबंधन जैसी चुनौतियां शामिल हैं।

बिजली विभाग का कहना है कि शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए ऑनलाइन पोर्टल, कॉल सेंटर और विभिन्न निगरानी प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार शिकायतों की गुणवत्ता और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के लिए भी लगातार समीक्षा की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शिकायतों की संख्या का निस्तारण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं की संतुष्टि और सेवा की गुणवत्ता को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। इसके लिए वितरण तंत्र को मजबूत करने, रखरखाव में सुधार और तकनीकी निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है।

फिलहाल विभाग के दावों और उपभोक्ताओं की शिकायतों के बीच मौजूद अंतर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार और शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।

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