यूरोप पर जयशंकर का तीखा पलटवार, बोले- भारत की सुरक्षा पर कभी नहीं सोचा, अब तेल पर दे रहे ज्ञान

भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने यूरोपीय देशों की आलोचनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिन देशों ने वर्षों तक भारत की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया, वे अब भारत को ऊर्जा और तेल नीति पर सलाह दे रहे हैं। उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के स्पष्ट और स्वतंत्र रुख को दर्शाता है।
जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेता है। उन्होंने संकेत दिया कि जब भारत सुरक्षा चुनौतियों और सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दों का सामना कर रहा था, तब कई पश्चिमी देशों ने अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। ऐसे में तेल और ऊर्जा से जुड़े निर्णय राष्ट्रीय हितों के आधार पर लिए जाते हैं, न कि बाहरी दबावों के अनुसार।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान भारत की उस विदेश नीति को प्रतिबिंबित करता है जिसमें रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है। हाल के वर्षों में भारत ने ऊर्जा आयात, रक्षा सहयोग और वैश्विक कूटनीति के मामलों में स्वतंत्र निर्णय लेने की नीति पर जोर दिया है।
भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है, लेकिन कुछ वैश्विक मुद्दों पर दोनों पक्षों के दृष्टिकोण अलग-अलग रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी इन मतभेदों का हिस्सा रही हैं।
जयशंकर के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका और अपने हितों को लेकर अधिक मुखर रुख के रूप में देखा जा रहा है। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह संदेश स्पष्ट करता है कि भारत वैश्विक मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र सोच और प्राथमिकताओं के आधार पर निर्णय लेना जारी रखेगा।



