बार-बार टॉक्सिक पार्टनर क्यों चुन लेते हैं लोग? साइकोलॉजिस्ट ने बताई वजह

कई लोग यह महसूस करते हैं कि उनकी हर रिलेशनशिप लगभग एक जैसी समस्याओं के साथ खत्म होती है। शुरुआत में सब कुछ अच्छा लगता है, लेकिन कुछ समय बाद नियंत्रण, भावनात्मक दबाव, असम्मान या असुरक्षा जैसी स्थितियां सामने आने लगती हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बार-बार टॉक्सिक पार्टनर की ओर आकर्षित हो रहा है, तो इसके पीछे कुछ गहरे भावनात्मक और व्यवहारिक पैटर्न हो सकते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि बचपन के अनुभव, परिवार में देखे गए रिश्ते और आत्मसम्मान (Self-Esteem) का स्तर हमारे रिश्तों के चुनाव को प्रभावित कर सकता है। जिन लोगों ने बचपन में अस्थिर, नियंत्रित या भावनात्मक रूप से जटिल संबंध देखे होते हैं, वे अनजाने में उन्हीं परिचित पैटर्न्स को अपने वयस्क रिश्तों में दोहराने लगते हैं। उन्हें ऐसा व्यवहार सामान्य या परिचित लग सकता है, भले ही वह उनके लिए नुकसानदायक हो।
इसके अलावा, कम आत्मविश्वास या लगातार दूसरों को खुश रखने की आदत भी व्यक्ति को टॉक्सिक रिश्तों की ओर धकेल सकती है। ऐसे लोग अक्सर रिश्ते में अपनी जरूरतों और सीमाओं को नजरअंदाज कर देते हैं। परिणामस्वरूप, वे ऐसे पार्टनर को स्वीकार कर लेते हैं जो भावनात्मक रूप से उपलब्ध नहीं होता, अत्यधिक नियंत्रित करने वाला होता है या रिश्ते में बराबरी का सम्मान नहीं देता।
मनोवैज्ञानिक सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि वह बार-बार एक जैसे अस्वस्थ रिश्तों में फंस रहा है, तो उसे अपने व्यवहारिक पैटर्न और भावनात्मक जरूरतों को समझने की कोशिश करनी चाहिए। आत्म-जागरूकता, स्पष्ट सीमाएं तय करना, स्वस्थ संवाद और जरूरत पड़ने पर पेशेवर काउंसलिंग लेना बेहतर रिश्तों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। स्वस्थ संबंध वह होता है जहां सम्मान, भरोसा और भावनात्मक सुरक्षा दोनों पक्षों को समान रूप से मिले।



