उत्तराखंड में श्रीअन्न पर संकट मंडराया, मंडुवा और झंगोरा की खेती में बड़ी गिरावट

उत्तराखंड में श्रीअन्न (मिलेट्स) की खेती पर संकट के संकेत दिखाई देने लगे हैं। राज्य की पारंपरिक फसलों मंडुवा और झंगोरा के रकबे में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेती की लागत बढ़ने, किसानों के पलायन, जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक और नकदी फसलों की ओर बढ़ते रुझान के कारण इन पारंपरिक फसलों की खेती प्रभावित हो रही है।
मंडुवा और झंगोरा उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की प्रमुख फसलें रही हैं। पोषण से भरपूर होने के कारण इन्हें श्रीअन्न के रूप में विशेष पहचान मिली है और केंद्र व राज्य सरकारें भी इनके उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। इसके बावजूद खेती का क्षेत्रफल अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इन पारंपरिक फसलों का उत्पादन और घट सकता है। किसानों को बेहतर बाजार, न्यूनतम समर्थन मूल्य, प्रसंस्करण सुविधाएं और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर ही श्रीअन्न की खेती को दोबारा मजबूती दी जा सकती है।
कृषि विभाग का कहना है कि किसानों को प्रोत्साहित करने, उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन व्यवस्था मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे मंडुवा और झंगोरा जैसी पारंपरिक फसलों की खेती को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।



