
अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट को नया नेतृत्व मिल गया है। भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। उनका चयन ऐसे समय हुआ है जब ट्रस्ट अपने प्रशासनिक और संचालन संबंधी ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
जितेंद्र मिश्रा का नाम भारतीय वायुसेना के बेहद अनुभवी अधिकारियों में लिया जाता है। उन्होंने करीब 38 साल तक वायुसेना में सेवा की और इस दौरान ऑपरेशनल कमान से लेकर रणनीतिक योजना और विमान परीक्षण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। अप्रैल 2026 में वायुसेना से सेवानिवृत्त होने से पहले वे वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके थे।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जितेंद्र मिश्रा की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए इस अभियान के दौरान उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाली थी। अभियान में उनके नेतृत्व और ऑपरेशनल योगदान के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।
उनका सैन्य करियर केवल ऑपरेशन सिंदूर तक सीमित नहीं रहा। कारगिल युद्ध के दौरान वे उस टीम का हिस्सा थे जिसने मिराज-2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने में भूमिका निभाई थी। इन क्षमताओं का इस्तेमाल ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर कार्रवाई में किया गया था।
जितेंद्र मिश्रा को विमान उड़ाने का भी व्यापक अनुभव रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, उनके पास 3,000 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव है और उन्होंने फाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट तथा हेलीकॉप्टर समेत 18 से अधिक प्रकार के विमानों को उड़ाया है। इस अनुभव ने उन्हें भारतीय वायुसेना के ऑपरेशनल और तकनीकी दोनों क्षेत्रों में मजबूत पहचान दिलाई।
अपने करियर में उन्होंने टेस्ट पायलट के तौर पर भी काम किया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित सैन्य अभ्यासों में भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व और नेतृत्व किया। उनकी जिम्मेदारियों में ऑपरेशनल कमान के साथ प्रशिक्षण, रणनीतिक योजना और सैन्य तकनीक से जुड़े अहम कार्य भी शामिल रहे।
जितेंद्र मिश्रा को उनकी सेवाओं के लिए कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान मिल चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल मिला। इससे पहले उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है।
अब उनकी नई भूमिका पूरी तरह अलग क्षेत्र में है। राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर वे मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कार्यों, संचालन, अनुपालन और विभिन्न व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे। सैन्य सेवा के दौरान हासिल अनुशासन, नेतृत्व और बड़े स्तर पर संचालन का अनुभव इस जिम्मेदारी में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
जितेंद्र मिश्रा का उत्तर प्रदेश से भी संबंध है। वे देवरिया जिले के रहने वाले हैं। ऐसे में अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके सैन्य और प्रशासनिक अनुभव के साथ उनका क्षेत्रीय जुड़ाव भी चर्चा में है।
राम मंदिर ट्रस्ट के लिए यह नियुक्ति प्रशासनिक दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है। ट्रस्ट के सामने मंदिर संचालन के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की व्यवस्था, प्रशासनिक समन्वय और विभिन्न विकास कार्यों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। ऐसे में CEO की नियुक्ति से रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज को एक स्पष्ट नेतृत्व मिलने की उम्मीद है।
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब ट्रस्ट अपने प्रशासनिक ढांचे को और पेशेवर बनाने पर जोर दे रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, CEO पद के लिए व्यापक चयन प्रक्रिया अपनाई गई थी और हजारों आवेदनों में से उम्मीदवारों को कई चरणों में शॉर्टलिस्ट किया गया। अंततः जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बनी।
एक तरफ उन्होंने अपने सैन्य करियर में युद्ध और सुरक्षा से जुड़ी जटिल परिस्थितियों में नेतृत्व किया, वहीं अब उनके सामने धार्मिक और प्रशासनिक संस्था के संचालन की जिम्मेदारी होगी। दोनों क्षेत्रों की प्रकृति अलग है, लेकिन संगठन प्रबंधन, अनुशासन, समन्वय और संकट से निपटने का अनुभव उनकी नई भूमिका में अहम हो सकता है।
कारगिल के मोर्चे से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारतीय वायुसेना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद जितेंद्र मिश्रा का राम मंदिर ट्रस्ट तक पहुंचना उनके लंबे सार्वजनिक जीवन की एक नई पारी है। अब देखना होगा कि वह अपने सैन्य अनुभव को राम मंदिर के प्रशासन और संचालन में किस तरह इस्तेमाल करते हैं।



