
पीएम मोदी ने बताया कि UPSC की शताब्दी प्रदर्शनी में उन्हें 1920 में सुभाष चंद्र बोस के सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े विवरण देखने को मिले। उन्होंने कहा कि उस समय ब्रिटिश शासन था और परीक्षा में संस्कृत का पेपर भी होता था, जिसे बोस ने संस्कृत में लिखा था।
UPSC के शताब्दी समारोह का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया गया। यह कार्यक्रम आयोग की 1926 में हुई स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित वर्षभर चलने वाले समारोहों का समापन था। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने स्मारक सिक्का, डाक टिकट और ‘100 Landmark Judgements’ नामक पुस्तक भी जारी की।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में UPSC की स्वतंत्रता, निष्पक्षता, योग्यता, गोपनीयता और निष्पक्ष प्रक्रियाओं को संस्था की महत्वपूर्ण पहचान बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आयोग को नई चुनौतियों और संभावनाओं के अनुरूप आगे बढ़ते हुए इन मूल मूल्यों को बनाए रखना चाहिए।



