
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। चर्चा का मुख्य फोकस महानदी के जल बंटवारे और लंबे समय से चले आ रहे विवाद का बातचीत, तकनीकी आकलन और आपसी सहमति के जरिए समाधान तलाशना रहा।
महानदी जल विवाद कई वर्षों से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच चला आ रहा है। ओडिशा का कहना है कि छत्तीसगढ़ में महानदी के ऊपरी हिस्से में बनाए गए जल प्रोजेक्टों से गैर-मानसून अवधि में उसके हिस्से में पानी का प्रवाह प्रभावित होता है। वहीं छत्तीसगढ़ सिंचाई, औद्योगिक और घरेलू जरूरतों के लिए अपने हिस्से के पानी के उपयोग की बात करता रहा है।
जुलाई में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसके बाद दोनों राज्यों ने केंद्रीय जल आयोग को लिखित रूप से यह भरोसा दिया था कि आयोग द्वारा दोनों राज्यों के व्यापक हित में लिया जाने वाला फैसला स्वीकार किया जाएगा।
बैठक के बाद समाधान की दिशा में बातचीत आगे बढ़ने के संकेत मिले हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी बैठक के बाद एक महीने के भीतर समाधान की उम्मीद जताई है, हालांकि अंतिम समाधान के लिए आगे की प्रक्रिया और तकनीकी स्तर की चर्चा महत्वपूर्ण होगी।



