
जलवायु परिवर्तन आज भारत समेत पूरी दुनिया के सामने एक अहम चुनौती है। इसी बीच सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में भारतीय संसद में पूछे गए कुल सवालों में केवल 3 प्रतिशत सवाल जलवायु से जुड़े विषयों पर थे। रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय चुनौतियों और इन मुद्दों पर संसदीय चर्चा की स्थिति को लेकर आंकड़े पेश किए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, संसद में जलवायु से जुड़े सवालों में प्रदूषण, तापमान में बदलाव, जल संकट, प्राकृतिक आपदाओं, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय शामिल रहे हैं। हालांकि, कुल संसदीय सवालों की तुलना में इन मुद्दों से जुड़े प्रश्नों की संख्या सीमित रही।
जलवायु परिवर्तन का असर कृषि, स्वास्थ्य, जल संसाधन, अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे जैसे कई क्षेत्रों पर पड़ता है। ऐसे में जलवायु संबंधी नीतियों, सरकारी योजनाओं और पर्यावरणीय चुनौतियों पर संसद में होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण मानी जाती है।
रिपोर्ट में पिछले एक दशक के संसदीय सवालों का विश्लेषण करते हुए जलवायु मुद्दों को संसद में मिलने वाली जगह पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके जरिए यह समझने की कोशिश की गई है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों को संसदीय प्रश्नों के माध्यम से किस तरह उठाया गया।
जलवायु से जुड़े मुद्दों पर उपलब्ध संसदीय आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से संबंधित विषय अलग-अलग क्षेत्रों और नीतिगत मामलों से जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट इसी व्यापक संदर्भ में संसद में जलवायु संबंधी सवालों की स्थिति का आकलन प्रस्तुत करती है।



