
Comptroller and Auditor General of India (CAG) की ताजा रिपोर्ट में National Highways Authority of India (NHAI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नियमों का सही पालन न करने की वजह से सड़क उपयोगकर्ताओं पर करीब ₹180.44 करोड़ का अतिरिक्त टोल बोझ पड़ा।
सीएजी ने बताया कि जब किसी परियोजना का कंसेशन पीरियड खत्म हो जाता है और टोल वसूली NHAI अपने हाथ में लेता है, तब नियमों के अनुसार टोल दरों को 40% तक कम किया जाना चाहिए। लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं किया गया, जिससे लोगों से अधिक शुल्क वसूला गया।
यह अनियमितताएं खासतौर पर गुजरात और महाराष्ट्र में टोल संचालन की समीक्षा के दौरान सामने आईं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि टोल मैनेजमेंट सिस्टम में एकरूपता की कमी और नीतियों के गलत क्रियान्वयन के कारण न सिर्फ आम लोगों पर बोझ बढ़ा, बल्कि सरकारी राजस्व को भी नुकसान हुआ।
सीएजी ने अपनी सिफारिशों में टोल सिस्टम को अधिक पारदर्शी और मानकीकृत बनाने पर जोर दिया है। साथ ही, डेटा प्रबंधन और संचालन में सुधार करने की जरूरत बताई गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों से बचा जा सके और आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।



