टाटा ट्रस्ट्स के फैसले को रतन टाटा के सहयोगी मेहली मिस्त्री ने दी चुनौती | कैविएट दायर कर रखा अपना पक्ष

टाटा ट्रस्ट्स के हालिया फैसले को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। रतन टाटा के करीबी और लंबे समय तक उनके सहयोगी रहे उद्योगपति मेहली मिस्त्री ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी है। मेहली मिस्त्री ने एक कैविएट (Caveat) दायर कर अदालत से अनुरोध किया है कि यदि टाटा ट्रस्ट्स से संबंधित कोई भी याचिका दायर होती है, तो उनका पक्ष सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए। यह कदम टाटा ग्रुप के भीतर चल रहे आपसी मतभेदों और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर सुर्खियों में ले आया है।
सूत्रों के अनुसार, मेहली मिस्त्री का यह कदम टाटा ट्रस्ट्स की हाल की प्रशासनिक नियुक्तियों और संरचनात्मक बदलावों से जुड़ा है। ट्रस्ट्स ने हाल ही में अपने बोर्ड में कुछ नए सदस्यों की नियुक्ति की थी, जिन पर मिस्त्री ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही और सभी ट्रस्टीज को समान रूप से शामिल नहीं किया गया।
टाटा ट्रस्ट्स, टाटा समूह की मूल इकाई है, जो टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी रखती है। इसके फैसले सीधे तौर पर टाटा ग्रुप की दिशा और नीतियों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में मेहली मिस्त्री की चुनौती को काफी अहम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह मामला समूह के गवर्नेंस मॉडल और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर गहरा असर डाल सकता है।
गौरतलब है कि मेहली मिस्त्री, साइरस मिस्त्री के परिवार से जुड़े हैं, जिन्होंने रतन टाटा के बाद टाटा संस के चेयरमैन के रूप में काम किया था। हालांकि, 2016 में साइरस मिस्त्री को पद से हटाए जाने के बाद टाटा समूह के अंदर एक बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया था। अब मेहली मिस्त्री की यह नई कानूनी पहल उस विवाद की कड़ी मानी जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, कैविएट दायर करना यह सुनिश्चित करने का एक तरीका है कि न्यायालय एकतरफा आदेश न दे। मेहली मिस्त्री का यह कदम दर्शाता है कि वे आने वाले समय में टाटा ट्रस्ट्स के प्रशासनिक ढांचे पर विस्तृत आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
टाटा ग्रुप की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि, उद्योग जगत में माना जा रहा है कि यह मामला फिर से टाटा समूह के भीतर पारदर्शिता, भरोसे और नेतृत्व के मुद्दों पर बहस को जन्म दे सकता है।



