Jeevan Ya Bheema Con Review: बेतुकी कॉमेडी में फंसे अरशद वारसी, डबल रोल भी नहीं बचा पाई फिल्म

अरशद वारसी, संजीदा शेख और विजय राज की फिल्म ‘Jeevan Ya Bheema Con?’ 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म का बेसिक आइडिया दिलचस्प है—कर्ज में डूबा एक कपल बीमा की रकम हासिल करने के लिए एक हमशक्ल की मदद से मौत का फर्जी खेल रचता है। लेकिन कहानी आगे बढ़ते-बढ़ते कमजोर स्क्रीनप्ले, उलझे हुए प्लॉट और जरूरत से ज्यादा फूहड़ कॉमेडी में फंस जाती है। कई समीक्षकों ने अरशद वारसी के अभिनय को फिल्म की बड़ी ताकत माना है, जबकि कॉमेडी और निर्देशन को कमजोर बताया है।
क्या है ‘Jeevan Ya Bheema Con?’ की कहानी?
फिल्म की कहानी जीवन और योजना नाम के एक कर्ज में डूबे कपल के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों बीमा की मोटी रकम हासिल करके अपने आर्थिक संकट से निकलना चाहते हैं।
इसके लिए जीवन अपनी मौत का नाटक रचता है और उसके हमशक्ल भीमा को कहानी में शामिल किया जाता है। प्लान के मुताबिक भीमा की मौत को जीवन की मौत साबित किया जाना है, ताकि योजना बीमा का पैसा क्लेम कर सके।
लेकिन जिस प्लान को दोनों आसान समझ रहे थे, वही आगे चलकर पहचान, धोखे और अपराध के ऐसे जाल में बदल जाता है जिससे निकलना मुश्किल हो जाता है।
अरशद वारसी ने निभाया डबल रोल
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत अरशद वारसी का डबल रोल है। वह जीवन और भीमा, दोनों किरदारों में नजर आते हैं।
जीवन और शराबी भीमा के व्यक्तित्व में अंतर दिखाने की कोशिश अरशद अपने अभिनय से करते हैं। समीक्षाओं के मुताबिक, फिल्म की कमजोरियों के बावजूद अरशद अपने किरदारों को पूरे उत्साह के साथ निभाते हैं और उनकी मौजूदगी फिल्म को संभालने की कोशिश करती है।
कॉमेडी के नाम पर फूहड़पन
फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसका ह्यूमर है। कहानी में कई ऐसे कॉमेडी सीक्वेंस डाले गए हैं जो हंसाने के बजाय असहज कर देते हैं।
खास तौर पर टॉयलेट और फार्ट जोक्स का इस्तेमाल काफी ज्यादा बताया गया है। कई समीक्षकों को लगा कि जिस कहानी में गलत पहचान और इंश्योरेंस फ्रॉड जैसे दिलचस्प तत्व मौजूद थे, उसे बेहतर कॉमेडी और स्मार्ट स्क्रीनप्ले की जरूरत थी।
विजय राज भी नहीं बचा पाए फिल्म
विजय राज फिल्म में विनायक नाम के कथित खतरनाक गैंगस्टर के किरदार में हैं। उनके साथ ब्रिजेंद्र काला भी अहम भूमिका में नजर आते हैं।
विजय राज इस तरह के किरदारों में पहले भी अपनी कॉमिक टाइमिंग दिखा चुके हैं और यहां भी उनका अभिनय ठीक है। लेकिन कमजोर लेखन की वजह से उनका किरदार भी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाता।
संजीदा शेख के किरदार के साथ नाइंसाफी
संजीदा शेख ने योजना का किरदार निभाया है। कहानी में उनका किरदार बेहद अहम है, क्योंकि बीमा की रकम हासिल करने की पूरी साजिश में वह जीवन की साझेदार हैं।
लेकिन समीक्षाओं में यह बात सामने आई है कि योजना के किरदार को पर्याप्त गहराई नहीं दी गई। उसके कई फैसले कहानी को आगे तो बढ़ाते हैं, लेकिन उन्हें विश्वसनीय बनाने के लिए जरूरी लेखन फिल्म में नजर नहीं आता।
कहानी का आइडिया अच्छा, निष्पादन कमजोर
फिल्म का मूल कॉन्सेप्ट निश्चित रूप से ऐसा है जिससे एक मजेदार क्राइम-कॉमेडी बनाई जा सकती थी। हमशक्ल, फर्जी मौत, इंश्योरेंस क्लेम और अपराधियों की एंट्री—इन सबमें कॉमेडी और सस्पेंस दोनों की गुंजाइश थी।
समस्या यह है कि फिल्म इन संभावनाओं का पूरी तरह फायदा नहीं उठा पाती। एक समीक्षा ने इसे ऐसे क्राइम-कॉमेडी के तौर पर देखा जिसमें दिलचस्प इंश्योरेंस-कॉन का आइडिया जरूरत से ज्यादा शोरगुल और टॉयलेट ह्यूमर में दब जाता है।
फिल्म का नाम भी बदला गया
फिल्म पहले ‘Jeevan Bheema Yojana’ नाम से जानी जाती थी। रिलीज से कुछ ही दिन पहले इसका नाम बदलकर ‘Jeevan Ya Bheema Con?’ किया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बदलाव CBFC के निर्देश के बाद हुआ क्योंकि पुराने नाम की समानता सरकारी जीवन बीमा योजना के नाम से थी। फिल्म में कुछ अश्लील दृश्यों और संवादों पर भी सेंसर संबंधी बदलाव किए गए।
डायरेक्शन कैसा है?
फिल्म का निर्देशन अभिषेक डोगरा ने किया है। समीक्षाओं में निर्देशन को औसत बताया गया है।
फिल्म करीब दो घंटे की है और इसका प्लॉट लगातार आगे बढ़ता रहता है, लेकिन कहानी की गति और हास्य के बीच संतुलन कायम नहीं हो पाता। कुछ समीक्षकों को फिल्म के कुछ हिस्से मनोरंजक लगे, लेकिन ओवरऑल अनुभव कमजोर रहा।
क्या अरशद वारसी की वजह से देख सकते हैं?
अगर आप अरशद वारसी की कॉमिक टाइमिंग के फैन हैं, तो फिल्म में उनके डबल रोल की वजह से कुछ हिस्से आपको पसंद आ सकते हैं। उनके अभिनय को कई समीक्षाओं ने फिल्म की सकारात्मक बात माना है।
लेकिन अगर आप एक मजबूत कहानी, साफ-सुथरी कॉमेडी और लगातार हंसाने वाली स्क्रिप्ट की उम्मीद कर रहे हैं, तो फिल्म निराश कर सकती है।
हमारी राय
‘Jeevan Ya Bheema Con?’ में एक ऐसी कहानी का बीज है जिससे शानदार क्राइम-कॉमेडी बनाई जा सकती थी। अरशद वारसी जैसा बेहतरीन कॉमिक अभिनेता, विजय राज और ब्रिजेंद्र काला जैसे कलाकार और डबल-रोल वाला कॉन्सेप्ट इसके पक्ष में जाता है।
लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और जरूरत से ज्यादा फूहड़ हास्य फिल्म की सबसे बड़ी कमियां बन जाते हैं। नतीजा यह कि अरशद वारसी अपनी तरफ से पूरा दम लगाते हैं, लेकिन स्क्रिप्ट उनका साथ नहीं दे पाती।
रेटिंग: ⭐⭐/5
फाइनल वर्डिक्ट:
‘Jeevan Ya Bheema Con?’ एक अच्छे आइडिया वाली लेकिन कमजोर तरीके से बनाई गई कॉमेडी है। अरशद वारसी का डबल रोल और कुछ कलाकारों का अभिनय देखने लायक है, लेकिन बेतुके प्लॉट और फूहड़ जोक्स के कारण फिल्म उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती।



