Tushar Hiranandani Exclusive: जन्मदिन पर मिला National Award, शरद केलकर ने ₹1 में किया काम

कभी फिल्मों में क्लैपर बॉय के तौर पर काम शुरू करने वाले तुषार हीरानंदानी आज उन फिल्मकारों में शामिल हैं जिनके खाते में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जैसी बड़ी उपलब्धि दर्ज हो चुकी है। उनकी फिल्म ‘श्रीकांत’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बेस्ट हिंदी फीचर फिल्म का सम्मान मिला। तुषार के लिए यह पल इसलिए भी यादगार बन गया क्योंकि यह सम्मान उनके जन्मदिन पर मिला। उन्होंने इसे जन्मदिन के सबसे खास तोहफों में से एक बताया।
जन्मदिन पर मिला सबसे खास तोहफा
‘श्रीकांत’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की खबर तुषार के लिए भावुक कर देने वाली थी। वह लंबे समय से श्रीकांत बोला की जिंदगी की कहानी को पर्दे पर लाना चाहते थे और इसके लिए कई वर्षों तक प्रयास करते रहे। फिल्म के सम्मान को उन्होंने सिर्फ अपनी उपलब्धि नहीं माना, बल्कि पूरी टीम और श्रीकांत बोला की प्रेरणादायक कहानी की जीत बताया।
तुषार के मुताबिक, राष्ट्रीय पुरस्कार हर फिल्मकार का सपना होता है। ‘श्रीकांत’ के लिए यह सम्मान इसलिए भी खास है क्योंकि फिल्म को पूरी आस्था और ईमानदारी के साथ बनाया गया था।
क्लैपर बॉय से नेशनल अवॉर्ड विनर डायरेक्टर तक का सफर
तुषार हीरानंदानी का फिल्मी सफर सीधे निर्देशन से शुरू नहीं हुआ। उन्होंने इंडस्ट्री में क्लैपर बॉय के तौर पर शुरुआत की। बाद में उन्होंने लेखक के रूप में पहचान बनाई और ‘मस्ती’, ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ और ‘एक विलेन’ जैसी फिल्मों की पटकथा से जुड़े। उनकी निर्देशित फिल्मों में ‘सांड की आंख’ और ‘श्रीकांत’ प्रमुख हैं।
‘श्रीकांत’ उनकी दूसरी फिल्म है और इसी फिल्म ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार की बड़ी उपलब्धि दिलाई।
शरद केलकर ने सिर्फ ₹1 में क्यों किया काम?
इंटरव्यू में तुषार ने फिल्म के अभिनेता शरद केलकर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि शरद केलकर ने ‘श्रीकांत’ में काम करने के लिए सिर्फ ₹1 फीस ली थी। तुषार के लिए यह सिर्फ आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि फिल्म की कहानी और उसके उद्देश्य के प्रति कलाकार के भरोसे का प्रतीक था।
शरद ने फिल्म में रवि मंथा का किरदार निभाया था, जो श्रीकांत बोला की जिंदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मेंटर थे। उनके अभिनय को भी फिल्म की खूबियों में गिना गया।
शरद केलकर ने नहीं सोचा था अवॉर्ड मिलेगा
फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद शरद केलकर ने भी कहा था कि जब तुषार उनके पास स्क्रिप्ट लेकर आए थे, तब उनका लक्ष्य पुरस्कार हासिल करना नहीं था। उनका फोकस श्रीकांत बोला की असाधारण कहानी के साथ न्याय करने पर था।
पत्नी निधि परमार को तुषार देते हैं सफलता का श्रेय
तुषार हीरानंदानी अपने करियर की सफलता में पत्नी और निर्माता निधि परमार हीरानंदानी के योगदान को बेहद अहम मानते हैं। दोनों ने इससे पहले ‘सांड की आंख’ जैसे प्रोजेक्ट पर भी साथ काम किया था। ‘श्रीकांत’ को भी निधि ने निर्माण के स्तर पर महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
राजकुमार राव ने निभाया था श्रीकांत बोला का किरदार
‘श्रीकांत’ में राजकुमार राव ने दृष्टिबाधित उद्योगपति श्रीकांत बोला की भूमिका निभाई थी। फिल्म उनकी जिंदगी के संघर्ष, शिक्षा के लिए लड़ाई और आगे चलकर उद्यमी बनने की कहानी पर आधारित है। ज्योतिका, अलाया एफ और शरद केलकर ने भी अहम भूमिकाएं निभाईं।
फिल्म की एक खास बात इसका समावेशी प्रतिनिधित्व भी रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें 70 से ज्यादा दिव्यांग कलाकारों को शामिल किया गया था।
AI और सोशल मीडिया के दौर पर भी बोले तुषार
इंटरव्यू में तुषार ने फिल्म इंडस्ट्री में तेजी से बदलते माहौल पर भी बात की। उन्होंने माना कि सोशल मीडिया ने लोगों की राय और प्रतिक्रियाओं को पहले से कहीं ज्यादा तेज और व्यापक बना दिया है। उन्होंने इंडस्ट्री में AI के बढ़ते प्रभाव को भी नजरअंदाज न किए जाने वाली हकीकत बताया।
उन्होंने इंडस्ट्री में कलाकारों और तकनीशियनों के भुगतान को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि कुछ लोग लंबे समय से कम भुगतान पर काम कर रहे हैं, जबकि कुछ को जरूरत से ज्यादा पैसा मिलता है।
‘श्रीकांत’ की कहानी क्यों बनी खास?
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका विषय रहा। श्रीकांत बोला ने दृष्टिबाधित होने के बावजूद शिक्षा और कारोबार की दुनिया में कई बाधाओं को पार किया और आगे चलकर Bollant Industries की स्थापना की। फिल्म ने उनकी जिंदगी को सहानुभूति की कहानी बनाने के बजाय संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी के रूप में पेश करने की कोशिश की।
राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद तुषार की इस फिल्म को एक नई पहचान मिली है। उनके लिए यह सम्मान सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उस कहानी और पूरी टीम पर दर्शाए गए भरोसे की बड़ी मुहर है।



