उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में डिक्की (DICCI – दलित इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की। इस मुलाकात में तीन अहम बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई — नीतिगत भागीदारी, टेंडर प्रक्रिया में शिथिलता, और आगामी अक्टूबर में प्रस्तावित राष्ट्रीय समागम। डिक्की प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से मांग की कि दलित और पिछड़े वर्गों के उद्यमियों को उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों में अधिक भागीदारी दी जाए, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिल सके।
डिक्की प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष सुझाव रखा कि वर्तमान में लागू टेंडर प्रक्रियाएं कई बार लघु और मध्यम वर्ग के उद्यमियों, विशेष रूप से SC/ST वर्ग से आने वाले व्यवसायियों के लिए अवरोधक बन जाती हैं। इसलिए उन्होंने सरकार से अपील की कि टेंडर प्रक्रिया में शिथिलता दी जाए, विशेष रूप से अनुभव और टर्नओवर जैसे मापदंडों में छूट प्रदान की जाए। इससे नए और छोटे उद्यमियों को भी सरकारी परियोजनाओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डिक्की की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि दलित और वंचित वर्ग के उद्यमियों को सशक्त बनाना आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल अभियान का अहम हिस्सा है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि डिक्की के प्रस्तावों का परीक्षण कर आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया आरंभ की जाए।
इसके अलावा, अक्टूबर 2025 में प्रस्तावित डिक्की राष्ट्रीय समागम पर भी चर्चा हुई, जो लखनऊ में आयोजित किया जाएगा। इस समागम में देशभर के दलित उद्यमी, स्टार्टअप फाउंडर्स, नीति निर्माता और उद्योग जगत से जुड़ी हस्तियां शामिल होंगी। डिक्की ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि इस आयोजन को राज्य सरकार का सहयोग और संरक्षण मिले, जिससे उत्तर प्रदेश को एक उद्यमशीलता हब के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
समागम का उद्देश्य न केवल नेटवर्किंग को बढ़ावा देना होगा, बल्कि निवेश के नए अवसर, वित्तीय सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन जैसे विषयों पर भी संवाद को आगे बढ़ाना है। डिक्की के अनुसार, यह समागम दलित उद्यमिता को नई दिशा देने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
मुलाकात के अंत में डिक्की ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश की सरकार सामाजिक न्याय और आर्थिक समावेशन की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगी। योगी सरकार की सक्रियता और संवाद की यह पहल राज्य में समान अवसर आधारित विकास मॉडल को सशक्त बनाने की दिशा में एक और अहम प्रयास मानी जा रही है।



