लखनऊ PGI में स्वाइन फ्लू और कोरोना के मरीज भर्ती, अलग निगरानी

लखनऊ में स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। संजय गांधी पीजीआई में स्वाइन फ्लू और कोरोना संक्रमित मरीजों के भर्ती होने के बाद अस्पताल प्रशासन उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। मरीजों की निगरानी और इलाज के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं।
SGPGI जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में अलग-अलग संक्रमण वाले मरीजों की निगरानी करना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अस्पताल में पहले से कई गंभीर बीमारियों का इलाज करा रहे मरीज भर्ती रहते हैं। संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान, जांच और उपचार के साथ संक्रमण की स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है।
स्वाइन फ्लू में बुखार, खांसी, गले में खराश, थकान, बदन दर्द और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में संक्रमण गंभीर रूप भी ले सकता है, खासकर जब सांस से जुड़ी समस्या बढ़ने लगे। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
कोरोना और स्वाइन फ्लू दोनों ही सांस से जुड़ी बीमारियां हैं, इसलिए इनके लक्षणों में कुछ समानताएं देखने को मिल सकती हैं। केवल लक्षणों के आधार पर दोनों संक्रमणों में अंतर करना हमेशा संभव नहीं होता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं।
लखनऊ में हालिया स्वाइन फ्लू संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाई है। राजधानी में स्वाइन फ्लू से एक महिला की मौत के बाद राज्य स्तर पर भी सतर्कता बढ़ाने और अस्पतालों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में दिक्कत या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। संक्रमण की पुष्टि होने पर डॉक्टर की निगरानी में उपचार और जरूरी सावधानियां अपनाना सबसे सुरक्षित तरीका है।



