
अमेरिकी टेक कंपनियां अमेजन, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में H1-B वीजा पर काम कर रहे अपने कर्मचारियों को अचानक एक ईमेल भेजा है, जिसमें उन्हें 24 घंटे के अंदर अमेरिका वापस लौटने का निर्देश दिया गया है। इस आदेश ने हजारों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स समेत विदेशी कर्मचारियों को गहरी चिंता में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाई गई नई शर्तों और इमिग्रेशन नीतियों में आए बदलाव के कारण कंपनियों को यह सख्त कदम उठाना पड़ा है।
भारत समेत कई देशों के लाखों कुशल कर्मचारी H1-B वीजा पर अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। ये कर्मचारी लंबे समय से अमेरिकी आईटी कंपनियों की मजबूती का आधार रहे हैं, लेकिन इमिग्रेशन नीतियों में कड़े बदलाव और अमेरिका में स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाए गए कदम अब इनके लिए बड़ी मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। अमेजन, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को अचानक मेल भेजकर साफ कर दिया है कि वे तुरंत अमेरिका लौटें, अन्यथा उनके कॉन्ट्रैक्ट और वीजा स्टेटस पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला सीधे-सीधे अमेरिकी प्रशासन के दबाव में लिया गया है। दरअसल, वीजा नियमों में हाल ही में हुए बदलाव के तहत H1-B वीजाधारकों को अनिवार्य रूप से अमेरिका में ही मौजूद रहना होगा और किसी भी स्थिति में वे लंबे समय तक अपने मूल देशों से काम नहीं कर सकते। कोविड महामारी के दौरान रिमोट वर्किंग को छूट दी गई थी, लेकिन अब यह पॉलिसी समाप्त कर दी गई है।
यह निर्णय खासकर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए झटका है। अनुमान है कि करीब 70% H1-B वीजा भारतीय नागरिकों के पास हैं। कई कर्मचारी अपने परिवार के साथ छुट्टी पर भारत आए हुए थे या रिमोट वर्क कर रहे थे, लेकिन अब अचानक उन्हें अमेरिका वापस लौटने के लिए 24 घंटे की डेडलाइन दी गई है। इससे उड़ानों की भारी मांग, टिकट की कीमतों में वृद्धि और कर्मचारियों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
कर्मचारियों के बीच यह बहस भी छिड़ गई है कि क्या कंपनियों को इतना कम समय देकर अचानक फैसले थोपने चाहिए। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह कर्मचारियों के साथ अन्याय है, क्योंकि महज 24 घंटे में टिकट बुक करना, परिवार को तैयार करना और अमेरिका की यात्रा करना लगभग असंभव सा है। वहीं दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों के पास विकल्प भी ज्यादा नहीं हैं, क्योंकि अगर वे अमेरिकी वीजा शर्तों का पालन नहीं करेंगी तो उन पर बड़े जुर्माने लगाए जा सकते हैं।
भारत सरकार ने भी इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत करेगा ताकि भारतीय पेशेवरों को राहत मिल सके। आईटी उद्योग से जुड़े संगठनों ने भी अपील की है कि ऐसे निर्णयों को लागू करने से पहले कम से कम कर्मचारियों को पर्याप्त समय दिया जाए।
H1-B वीजा संकट ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि विदेशी कर्मचारियों की स्थिति अमेरिका में कितनी अस्थिर है। जब भी प्रशासनिक बदलाव होते हैं, तो सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर पड़ता है। अमेजन, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट के ताज़ा निर्देशों ने एक बार फिर टेक जगत में असुरक्षा की लहर दौड़ा दी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या अमेरिकी प्रशासन इस अल्टीमेटम पर कुछ नरमी दिखाता है या फिर हजारों कर्मचारियों को वाकई अचानक अपने जीवन और कामकाज को समेटकर अमेरिका लौटना पड़ेगा।



