
अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी को लगभग चार साल हो चुके हैं, लेकिन इसके असर आज भी क्षेत्रीय सुरक्षा पर साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं। 2021 में अमेरिकी सैनिकों की जल्दबाज़ी में हुई वापसी के दौरान अफगानिस्तान में अरबों डॉलर के आधुनिक हथियार, सैन्य वाहन, हेलीकॉप्टर और अत्याधुनिक उपकरण वहीं छूट गए थे। इन हथियारों पर कब्जा तालिबान ने कर लिया और आज वही हथियार पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल हो रहे हैं। यह घटनाक्रम न केवल दक्षिण एशिया के लिए बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गया है।
तालिबान और पाकिस्तान के रिश्ते शुरू से ही जटिल रहे हैं। अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज़ होने के बाद तालिबान ने कई बार पाकिस्तान को सहयोग का भरोसा दिया, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच तनाव बढ़ता चला गया। पाकिस्तान लंबे समय से टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) से जूझ रहा है, और अफगान तालिबान पर इस संगठन को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। अब स्थिति यह हो गई है कि अमेरिकी छोड़े हुए हथियार पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और सेना के खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि अमेरिकी हथियारों का यह इस्तेमाल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। पाकिस्तान पहले ही आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। ऐसे में यदि तालिबान और टीटीपी इन हथियारों से और अधिक ताकतवर हो जाते हैं, तो पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि तालिबान के पास अब अत्याधुनिक नाइट विज़न डिवाइस, ड्रोन और आर्मर्ड गाड़ियाँ तक मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में हो रहा है।
यह स्थिति अमेरिका की नीतियों पर भी सवाल उठाती है। अमेरिकी नेतृत्व ने उस समय दावा किया था कि अफगानिस्तान से निकलते वक्त उनके हथियार निष्क्रिय कर दिए गए हैं, लेकिन आज की सच्चाई यह है कि उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान में आतंक और अस्थिरता फैलाने के लिए किया जा रहा है। इससे यह भी साफ होता है कि हथियारों पर नियंत्रण न होना आने वाले समय में किसी भी देश के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की शांति और सुरक्षा से जुड़ा है। यदि इन हथियारों का इस्तेमाल लगातार बढ़ा, तो यह न केवल पाकिस्तान बल्कि भारत और मध्य एशिया तक के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए अब ज़रूरत है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस मुद्दे को गंभीरता से ले और आतंकवाद तथा अवैध हथियारों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।



